राजकोषीय घाटे को कम करने में सफल रही माया सरकार
ओ.पी. पाल
उत्तर प्रदेश में आगामी प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले शायद मायावती सरकार का पेश किया गया वर्ष 2011-12 के बजट में किसी प्रकार के कर का प्रस्ताव नहीं है, जबकि यह बजट घाटे को दर्शाता है, लेकिन बीते साल की अपेक्षा इस बार यूपी सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने में भी सफल रही। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वांचल और बुंदेलखंड के विकास के लिए बजट में अलग से धन आवंटित करने का प्रस्ताव करके इन पिछड़े क्षेत्रों के विकास की बाट जो रहे लोगों के सामने भी उम्मीद की किरण पैदा की है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विधानसभा में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीति पर आधारित पेश किया गया बजट भले ही घाटे को दर्शा रहा है लेकिन 169416. 38 करोड़ रुपये के बजट में किसी नए कर का प्रस्ताव करके मायावती सरकार ने जहां राज्य के उन लोगों
को राहत दी है जो पहले से ही कर के बोझ तले दबें हुए हैं तो वहीं राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत तय किए गए जीडीपी के 3 फीसदी के बराबर घाटे के लक्ष्य को हासिल किया है। मायावती सरकार ने सालाना बजट में 5153 करोड़ रुपये की 173 नई योजनाएं शुरू करने का ऐलान करके मानो लोगों के सामने राहत का पिटारा खोल दिया हो। वित्त मंत्री लालजी वर्मा द्वारा सदन में पेश किये गए बजट की कुल धनराशि पिछले साल के बजट से 13 हजार करोड़ यानी 12 प्रतिशत अधिक है। इस बजट में अगले वित्त वर्ष में 1,66,012. 86 करोड़ रुपये से ज्यादा की राजस्व प्राप्ति का अनुमान लगाया गया है। भले ही इस बार मायावती सरकार ने बजट में पार्कों, स्मारको और मूर्तियों के लिए 122 करोड़ रुपये की रकम का आवंटन किया है, लेकिन वहीं शिक्षा, सामाजिक विकास, चिकित्सा और शहरी अवस्थापना क्षेत्रों के लिए भी भारी भरकम रकम आवंटित करने का प्रावधान किया है। सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं, महिला एवं बाल विकास परियोजनाओं, बिजली क्षेत्र की विभिन्न योजनाओं, प्राथमिक स्कूलों व मदरसो में शिक्षकों की नियुक्ति, कानून-व्यवस्था में सुधार व पुलिस के आधुनिकीकरण पर भी बजट का निर्धारण किया है। बजट में दलितों के उत्थान के लिए चलाई जा रही योजना स्पेशल कंपोनेंट प्लान के साथ ही ड्रीम कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के लिए भी बजट में प्रावधान किया है। बजट में सर्वाधिक रकम शिक्षा के क्षेत्र में आबंटित की गई और सरकार ने इसके अलावा भी कई लोक लुभावन घोषणाएं की हैं।
ओ.पी. पाल
उत्तर प्रदेश में आगामी प्रस्तावित विधानसभा चुनावों से पहले शायद मायावती सरकार का पेश किया गया वर्ष 2011-12 के बजट में किसी प्रकार के कर का प्रस्ताव नहीं है, जबकि यह बजट घाटे को दर्शाता है, लेकिन बीते साल की अपेक्षा इस बार यूपी सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने में भी सफल रही। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वांचल और बुंदेलखंड के विकास के लिए बजट में अलग से धन आवंटित करने का प्रस्ताव करके इन पिछड़े क्षेत्रों के विकास की बाट जो रहे लोगों के सामने भी उम्मीद की किरण पैदा की है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विधानसभा में सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय की नीति पर आधारित पेश किया गया बजट भले ही घाटे को दर्शा रहा है लेकिन 169416. 38 करोड़ रुपये के बजट में किसी नए कर का प्रस्ताव करके मायावती सरकार ने जहां राज्य के उन लोगों
को राहत दी है जो पहले से ही कर के बोझ तले दबें हुए हैं तो वहीं राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत तय किए गए जीडीपी के 3 फीसदी के बराबर घाटे के लक्ष्य को हासिल किया है। मायावती सरकार ने सालाना बजट में 5153 करोड़ रुपये की 173 नई योजनाएं शुरू करने का ऐलान करके मानो लोगों के सामने राहत का पिटारा खोल दिया हो। वित्त मंत्री लालजी वर्मा द्वारा सदन में पेश किये गए बजट की कुल धनराशि पिछले साल के बजट से 13 हजार करोड़ यानी 12 प्रतिशत अधिक है। इस बजट में अगले वित्त वर्ष में 1,66,012. 86 करोड़ रुपये से ज्यादा की राजस्व प्राप्ति का अनुमान लगाया गया है। भले ही इस बार मायावती सरकार ने बजट में पार्कों, स्मारको और मूर्तियों के लिए 122 करोड़ रुपये की रकम का आवंटन किया है, लेकिन वहीं शिक्षा, सामाजिक विकास, चिकित्सा और शहरी अवस्थापना क्षेत्रों के लिए भी भारी भरकम रकम आवंटित करने का प्रावधान किया है। सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं, महिला एवं बाल विकास परियोजनाओं, बिजली क्षेत्र की विभिन्न योजनाओं, प्राथमिक स्कूलों व मदरसो में शिक्षकों की नियुक्ति, कानून-व्यवस्था में सुधार व पुलिस के आधुनिकीकरण पर भी बजट का निर्धारण किया है। बजट में दलितों के उत्थान के लिए चलाई जा रही योजना स्पेशल कंपोनेंट प्लान के साथ ही ड्रीम कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के लिए भी बजट में प्रावधान किया है। बजट में सर्वाधिक रकम शिक्षा के क्षेत्र में आबंटित की गई और सरकार ने इसके अलावा भी कई लोक लुभावन घोषणाएं की हैं।
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