शनिवार, 26 मार्च 2011

एक पद-एक व्यक्ति के सिद्धांत ध्वस्त!

कांग्रेस कार्यसमिति का पुनर्गठन
ओ.पी. पाल

कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों को लेकर जिस प्रकार से कांग्रेस हाईकमान एक पद-एक व्यक्ति के फार्मूले का ढोल पीटता आ रहा था, वह सभी दावे कांग्रेस कार्यसमिति के पुनर्गठन में धरे नजर आये। हालांकि कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी ने कई दिग्गजों को कार्यसमिति से बाहर का रास्ता दिखाया है, लेकिन कांग्रेस चाहते हुए भी कुछ केंद्रीय मंत्रियों को कार्यसमिति से अलग नहीं कर पाई है।
कांग्रेस कार्यसमिति के शुक्रवार को हुए बहुप्रतीक्षित पुनर्गठन में जी. वेंकटस्वामी, मलिकार्जुन खडगे, श्रीमती मोहसिना किदवई, पृथ्वीराज चव्हाण, वी. किशोर चंद्रा देवो तथा वी. नारायणसामी समेत छह दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखाया है तो इनमें मोहसिन किदवई और वी. नारायणसामी को महासचिव पद से भी हटा दिया गया है। हालांकि पृथ्वीराज चव्हाण को महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री बनने के बाद हटना ही था। लेकिन कांग्रेस एक व्यक्ति एक पद विषय पर काफी चर्चा होने के बावजूद पार्टी ने इस नियम का कड़ाई से पालन नहीं कर पाई है क्योंकि केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद और मुकुल वासनिक को महासचिव पद पर बरकरार रखा गया है। आजाद फिलहाल तमिलनाडु के पार्टी प्रभारी हैं जहां पर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसके अलावा उन्हें आंध्र प्रदेश का जिम्मा भी सौंपा गया है जहां पर अलग तेलंगाना राज्य गठन सहित कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक हलचल है। वासनिक बिहार के पार्टी प्रभारी थे जहां पर गत वर्ष नवम्बर में हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। वह अब केवल राजस्थान का मामला देखेंगे। इसके अलावा कार्यसमिति में बरकरार रहने वालों में राहुल गांधी के अलावा वरिष्ठ मंत्री प्रणव मुखर्जी, एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, अंबिका सोनी और मोतीलाल वोरा, दिग्विजय सिंह, जनार्दन द्विवेदी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। कार्यसमिति में अब सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सहित 19 सदस्य हो गए हैं। वहीं आस्कर फर्नांडिस को कार्यसमिति में शामिल करते हुए महासचिव बनाया गया है। गृह मंत्री एवं विशिष्ट को समूह के सदस्य पी चिदम्बरम को कार्यसमिति का स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। वहीं तेलंगाना क्षेत्र से पार्टी के वरिष्ठ एवं हाल में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ बोलने वाले नेता जी वेंकटस्वामी को कार्यसमिति से बाहर कर दिया गया है। पिछले दो लोकसभा चुनावों में सबसे अधिक पार्टी सांसद भेजने वाले आंध्र प्रदेश का पुनर्गठित कार्यसमिति में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। यदि देखा जाए तो कांग्रेस चाहते हुए भी एक पद एक व्यक्ति के सिद्धांत पर नहीं टिक सकी है।

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