शनिवार, 12 मार्च 2011

काले धन पर मॉरीशस करेगा भारत की मदद

ओ.पी. पाल
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के अभिभाषण में भी केंद्र सरकार के उस प्रयास का जिक्र किया है जिसके लिए मनमोहन सरकार भ्रष्टाचार और काले धन पर गंभीरता से विचार कर रही है। काले धन पर भारत के सामने आ रही बाधाओं के लिए उसे समर्थन देने के लिए अब मॉरीशस आगे आ गया है तो यूपीए सरकार को इस मामले में तीव्रता से कार्यवाही करने की दरकार है।
देश में भ्रष्टाचार, घोटाले और विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के मुद्दे पर चौतरफा घिरी मनमोहन सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है। हालांकि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के सोमवार को संसद के संयुक्त सदन की बैठक में काले धन का जिक्र करते हुए इस बात को भी दोहराया गया है कि सरकार काले धन की पहचान करने और उसे वापस लाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय विशेषकर गुट-20 के साथ निरंतर कार्य कर रही है। वहीं हवाला कारोबार निरोधक और कर चोरी निरोधक उपायों के मद्देनजर भारत अब वित्तीय कार्यों संबंधी कार्यबल का सदस्य बनने की भी बात कही गई है। भारत सरकार विदेश में जमा भारत की धन संपदा को वापस लाने और दोषियों का पता लगाकर उन्हें सजा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी जिसके लिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक संधि का अनुमोदन करने का भी फैसला किया है। वहीं काले धन पर आलोचना का सामना कर रहे मॉरीशस ने भारत को अवैध संपत्ति के स्रोतों का पता लगाने में पूरा समर्थन देने का आश्वासन दे दिया है लेकिन मॉरीशस ने हर वित्तीय घोटाले को उसके साथ जोड़ने पर आपत्ति भी जताई है। मॉरीशस के वित्त मंत्रालय का कहना है कि काले धन का पता लगाने में मॉरीशस भारत के साथ सहयोग करता रहा है और पिछले दिनों दोनों देशों के इस सहयोग को और सुदृढ़ बनाया गया है। मॉरीशस का मानना है कि वह मांगे जाने पर मॉरीशस के बैंकों में भारतीय नागरिकों के खातों के बारे में भी जानकारी उपलब्ध कराएगा, लेकिन साथ ही वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि मॉरीशस काले धन की किसी सनसनीखेज तलाश की अनुमति नहीं देंगे। भारत में विदेशी पूंजी निवेश के मामले में मॉरीशस पहले नंबर पर है और हाल के दिनों में यह आशंका जताई जा रही है कि भारतीयों का काला धन मॉरीशस होकर फिर से देश में लाया जा रहा है। टेलिकॉम और रीयल एस्टेट क्षेत्रों में मॉरीशस की वेंचर कैपिटल कंपनियों के निवेश में तेजी के बाद भारतीय अधिकारियों ने सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। यह भी गौरतलब है कि टैक्स फ्रेंडली मॉरीशस हमेशा से भारत में निवेश करने वालों में अत्यंत लोकप्रिय रहा है, लेकिन इसका फायदा भारत से काले धन को मॉरीशस ले जाने और वहां से फिर से औपचारिक रूप से भारत लाने वालों ने भी उठाया है। भारत के सामने बाधाएं तो तब सामने आई जब मॉरीशस हर भारतीयों के बारे में सूचना देने से इनकार करता रहा है और यही कहता रहा कि सूचनाएं स्थापित अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर प्रदान की जाएंगी। स्विट्जरलैंड को भारतीय काले धन का सबसे प्रमुख लक्ष्य बताया जाता है। स्विस अधिकारियों ने भी भारत को किसी भारतीय के बैंक खाते के बारे में तभी सूचना देने की बात कही है जब उसकी मांग संदिग्ध कर चोरी के अपराध के सिलसिले में होगी। मॉरीशस ने अब काले धन पर भारत की मदद करने का फैसला करके भारत के प्रयास को गति दी है, लेकिन इसके लिए भारत के साथ उसकी वर्तमान संधि में बैंकिग जानकारी के आदान प्रदान का प्रावधान रहेगा।

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