शनिवार, 12 मार्च 2011

प्रधानमंत्री की भूमिका पर सवाल

यूपीए सरकार के नेतृत्व पर भाजपा का हमला
ओ.पी. पाल
संसद के बजट सत्र में दोनों सदनों में भाजपा ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध करते हुए भ्रष्टाचार और घोटालों पर यूपीए सरकार को घेरते हुए सरकार के नेतृत्व पर सवालिया निशान लगाये। जहां राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने 2जी स्पेक्ट्रम मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में उनकी भूमिका को अप्रत्याशित करार दिया तो लोकसभा में भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस नीत यूपीए सरकार के शासन में 2जी स्पेक्ट्रम, खाद्यान्न, आवास, खेल और जमीन जैसे घोटालो पर मनमोहन सरकार पर जमकर हमला बोला।
राज्यसभा में जनार्दन द्विवेदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया जिसका समर्थन कांग्रेस सांसद जयंती नटराज ने किया। इस प्रस्ताव पर चर्चा की शुरूआत करते हुए सदन में प्रतिपक्ष के नेता अरुण जेटली ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मुद्दे से यूपीए सरकार को चौतरफा घेरते हुए की, तो सत्तापक्ष से कुछ सांसदों ने बीच में व्यवधान पैदा करने करते हुए कहा कि यह 2जी स्पेक्ट्रम पर नहीं राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा है। इसके लिए नियमों की भी दलील दी गई, लेकिन उसमें भी विपक्ष ने ही बाजी मारी। इसके बाद जिस प्रकार से जेटली ने यूपीए सरकार को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले को फोकस करते हुए यूपीए शासनकाल में हुए घोटालों पर तर्क देते हुए तीखे प्रहार करने शुरू कर दिये। इस दौरान सदन में प्रधानमंत्री स्वयं भी मौजूद रहे। प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए अरुण जेटली ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि यह सब कुछ चलता रहा ओर सरकार चुप बैठे रही। अब प्रधानमंत्री खुद को इससे अलग कर रही है जबकि सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कुछ निहित कारणों से दूरसंचार और राजमार्ग का आउटसोर्स किए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में ऐसे लोगों को क्यों चुना गया जिनकी सत्यनिष्ठा पर पहले से ही सवालिया निशान लगे थे। जेटली ने सवाल उठाया कि क्या दूरसंचार मंत्रालय केवल एक ही पार्टी के लिए आरक्षित है और वह भी एक राज्य में सत्तारुढ़ पार्टी के लिए? क्या गठबंधन की मजबूरी की कीमत हमें इस रूप में चुकानी पड़ेगी। उन्होंने तर्क दिया कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में तत्कालीन वित्त मंत्री तक ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था और उसके जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय से भी पत्र लिखे गये। ऐसे में प्रधानमंत्री इस मुद्दे से अपने आपको अलग कैसे कर सकते हैं। इसके बावजूद सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की? उन्होंने कहा विपक्ष जानना चाहता है कि इस मुद्दे पर सरकार की मंशा क्या है और सरकार बहुत बेमन से कार्रवाई करने की बात कह रही है। उन्होंने मीडिया से पीएम के साक्षात्कार के हवाले से कहा कि जिस प्रकार से प्रधानमंत्री ने यूपीए-2 में हो रहे घोटाले से अपने आपको अलग करने का प्रयास किया है उससे तो यही साबित होता है कि केंद्र सरकार का नेतृत्व सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री के ईमानदार होने और उनके एक जानेमाने अर्थशास्त्री होने पर सवाल नहीं उठा रहे हैं लेकिन नीति निर्धारण में सरकार का नेतृत्व की जवाबदेही बनती है। जेटली ने कहा कि यह भी कहा जा रहा है कि गुण दोष के आधार पर सब्सिडी दी जानी चाहिए। पर क्या दूरसंचार क्षेत्र में ऐसे आॅपरेटर हैं जिन्हें सब्सिडी दी जानी चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री द्वारा गठबंधन की मजबूरियों का जिक्र करना तो एकदम अप्रत्याशित ही था। निवेश का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि निवेश बढ़ने से भारत में अधिक कार्यकलाप बढ़ेंगे, रोजगार सृजन होगा, सरकार के पास अधिक राजस्व आएगा और इस प्रक्रिया को अधिक बढ़ावा भी मिलेगा। लेकिन जब भारत निवेश के लिए आकर्षक स्थल ही नहीं रहेगा तो विदेशों के साथ-साथ घरेलू कंपनियां भी अपना मुंह मोड़ेंगी। जेटली ने राष्ट्रमंडल खेलों, आदर्श सोसायटी घोटाले, इसरो के एस बैंड स्पेक्ट्रम मामले पर भी सवाल उठाये। जेटली ने कहा कि कहीं भी, कभी भी ऐसा खेल आयोजन नहीं हुआ जब खेल पूरी तरह से संदेह के दायरे में रहे हों। उन्होंने कहा कि आयोजकों ने इन खेलों को लेकर नकारात्मक माहौल बना दिया। जेटली ने कहा कि कई ऐसे मामले सामने आए जिन पर अनावश्यक खर्च किया गया। इनका आगे देश के लिए क्या उपयोग होगा, इस बारे में सरकार अब भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। एस बैंड स्पेक्ट्रम मामले का जिक्र करते हुए जेटली ने कहा कि इसरो की व्यवसायिक शाखा का एक निजी कंपनी के साथ हुआ सौदा रद्द कर दिया गया। सवाल यह है कि यह ठेका क्यों दिया गया था। उन्होंने कहा कि इसरो एक प्रतिष्ठित संस्था है और उपग्रहों के विफल होने पर भी दलगत राजनीति से उठ कर वैज्ञानिकों को सम्मान दिया जाता है क्योंकि उनकी सेवाएं देश के प्रति समर्पित होती हैं। पर यह बात कैसे कही जा सकती है कि वर्ष 2010 में दिए गए इस ठेके के बारे में प्रधानमंत्री कार्यालय को कोई जानकारी नहीं थी यह कतई किसी के गले उतरने वाली नहीं है।उधर लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण में आर्थिक क्षेत्र, आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा, खेती, किसान, बेरोजगारी, कश्मीर जैसे मुद्दों पर सरकार की दिशा का सख्त अभाव बताते हुए भाजपा ने आज कालाधन पर श्वेत पत्र और तेलंगाना राज्य के गठन के लिए लाने की मांग की। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर भाजपा की ओर से चर्चा की शुरूआत करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि भाजपा नीत राजग सरकार के समय संचार क्रांति आई जबकि कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के समय 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला हुआ। राजग के समय देश खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हुआ, संप्रग के समय खाद्यान्न घोटाला हुआ। राजग के समय अंतरिक्ष क्षेत्र में चंद्रयान अभियान की नींव रखी गई जबकि संप्रग के समय एस बैंड घोटाला सामने आया। सिंह ने कहा कि संसद में व्यवस्थित कायर्वाही की सबसे अधिक जिम्मेदारी सत्ताधारी पार्टी की होती है। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला पूरी तरह से प्रणालीगत विफलता के रूप में सामने आया जिसकी जेपीसी से जांच कराने की विपक्ष ने मांग की लेकिन इस छोटी सी मांग को मानने के लिए संसद का एक पूरा सत्र कुर्बान करने के बाद अब उसे माना गया। उन्हच्ंने कहा कि हम प्रधानमंत्री की नीयत पर शक नहीं करते हैं लेकिन वह देश को बतायें कि विभिन्न घोटालों समेत देश के सामने उत्पन्न समस्याओं के लिए कौन दोषी है। क्या वह परेशान हैं, क्या वह थक हार कर बैठ गए हैं।

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