कार्यसमिति में महासिच बने बीरेन्द्र सिंह
ओ.पी. पाल
कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने पार्टी कार्यसमिति एवं संगठन में जो भारी फेरबदल करते हुए हरियाणा को तरजीह दी है और उसमें शामिल राज्यसभा सांसद बीरेन्द्र सिंह को राष्ट्रीय महासचिव पद के अलावा तीन राज्यों की जिम्मेदारी सौंपने से जहां कांग्रेस में बीरेन्द्र सिंह का राजनीतिक कद बढ़ा है, वहीं हरियाणा की मौजूदा राजनीति में भी मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
कांग्रेस हाईकमान द्वारा चौधरी बीरेन्द्र सिंह को राष्ट्रीय महासचिव बनाने के साथ दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्य का प्रभार सौंपे जाना इस बात का संकेत है कि हरियाणा में कांग्रेस की राजनीति में संतुलन बनाने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति में हरियाणा को ऐसे समय में प्रतिनिधित्व दिया है जिससे हरिया
णा कांग्रेस राजनीति में नये समीकरण बनने की संभावना है। हरियाणा की राजनीति में बीरेन्द्र सिंह ऐसे दूसरे कांग्रेस नेता रहे हैं जो मुख्यमंत्री के दावेदार हैं। जब कांग्रेस हाईकमान ने भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया था तब भी बीरेन्द्र सिंह इस पद के ठोस दावेदार थे, लेकिन हरियाणा कांग्रेस की अंतर्कलह के कारण ऐसा नहीं हो सका था। एक समय था जब 1991 में चौधरी बीरेन्द्र सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गये थे इसका कारण रहा कि तभी राजीव गांधी की हत्या हो गई थी और राजीव गांधी के स्थान पर पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। हरियाणा की राजनीति में चौधरी बीरेन्द्र सिंह और मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के बीच हमेशा छत्तीस का आंकडा रहा है जो अभी भी बरकरार माना जा सकता है। हुड्डा की हुकुमत से राज्य का कोई भी बड़ा कांग्रेस नेता खुश नहीं दिखाई दे रहा है जिसके कारण हुड्डा के खिलाफ छत्तीस के आंकडे में हालांकि केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा व राव इंद्रजीत के अलावा किरण चौधरी भी शामिल है। हरियाणा कांग्रेस की इस अंतर्कलह का कारण ही माना गया है कि पिछले विधानसभा चुनाव में चौधरी बीरेन्द्र सिंह जिंद जिले की उचानकलां विधानसभा सीट पर इनेलो के ओमप्रकाश चौटाला से पराजित हो गये, जिसमें बीरेन्द्र सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी शिकायत की थी कि उसकी हार में सरकारी मिशनरी का भी बड़ा हाथ रहा है। इसके बाद भूपेन्द्र हुड्डा के विरोध के बावजूद कांगे्रस हाई कमान ने राज्य में कांग्रेस की राजनीति को संतुलित करने की दिशा में बीरेन्द्र सिंह को राज्यसभा का टिकट देकर केंद्र की राजनीति में बुला लिया। कांग्रेस में हुड्डा गुट शायद अभी उस झटके से उबरा भी नहीं था कि कांग्रेस हाईकमान ने चौधरी बीरेन्द्र सिंह के कद को ऊंचा करते हुए उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति में महासचिव की जिम्मेदारी सौंप दी और साथ ही उन्हें तीन राज्यों का प्रभारी बना दिया, जो हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के लिए करारा झटका है। चौधरी बीरेन्द्र सिंह पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री सर छोटूराम के नाती है और हरियाणा में किसानों के लिए राजनीति में उन्हीं की राह पर चौधरी बीरेन्द्र सिंह भी अपने राजनीतिक कद को बनाये हुए हैं, जो उचानकलां से करीब छह बार विधायक रह चुके हैँ। कांग्रेस हाईकमान के निर्णय से निश्चित रूप से चौधरी बीरेन्द्र सिंह का राजनीतिक कद बढ़ा है।
ओ.पी. पाल
कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने पार्टी कार्यसमिति एवं संगठन में जो भारी फेरबदल करते हुए हरियाणा को तरजीह दी है और उसमें शामिल राज्यसभा सांसद बीरेन्द्र सिंह को राष्ट्रीय महासचिव पद के अलावा तीन राज्यों की जिम्मेदारी सौंपने से जहां कांग्रेस में बीरेन्द्र सिंह का राजनीतिक कद बढ़ा है, वहीं हरियाणा की मौजूदा राजनीति में भी मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
कांग्रेस हाईकमान द्वारा चौधरी बीरेन्द्र सिंह को राष्ट्रीय महासचिव बनाने के साथ दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड राज्य का प्रभार सौंपे जाना इस बात का संकेत है कि हरियाणा में कांग्रेस की राजनीति में संतुलन बनाने के लिए कांग्रेस कार्यसमिति में हरियाणा को ऐसे समय में प्रतिनिधित्व दिया है जिससे हरिया
णा कांग्रेस राजनीति में नये समीकरण बनने की संभावना है। हरियाणा की राजनीति में बीरेन्द्र सिंह ऐसे दूसरे कांग्रेस नेता रहे हैं जो मुख्यमंत्री के दावेदार हैं। जब कांग्रेस हाईकमान ने भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया था तब भी बीरेन्द्र सिंह इस पद के ठोस दावेदार थे, लेकिन हरियाणा कांग्रेस की अंतर्कलह के कारण ऐसा नहीं हो सका था। एक समय था जब 1991 में चौधरी बीरेन्द्र सिंह हरियाणा के मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गये थे इसका कारण रहा कि तभी राजीव गांधी की हत्या हो गई थी और राजीव गांधी के स्थान पर पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने। हरियाणा की राजनीति में चौधरी बीरेन्द्र सिंह और मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के बीच हमेशा छत्तीस का आंकडा रहा है जो अभी भी बरकरार माना जा सकता है। हुड्डा की हुकुमत से राज्य का कोई भी बड़ा कांग्रेस नेता खुश नहीं दिखाई दे रहा है जिसके कारण हुड्डा के खिलाफ छत्तीस के आंकडे में हालांकि केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा व राव इंद्रजीत के अलावा किरण चौधरी भी शामिल है। हरियाणा कांग्रेस की इस अंतर्कलह का कारण ही माना गया है कि पिछले विधानसभा चुनाव में चौधरी बीरेन्द्र सिंह जिंद जिले की उचानकलां विधानसभा सीट पर इनेलो के ओमप्रकाश चौटाला से पराजित हो गये, जिसमें बीरेन्द्र सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी शिकायत की थी कि उसकी हार में सरकारी मिशनरी का भी बड़ा हाथ रहा है। इसके बाद भूपेन्द्र हुड्डा के विरोध के बावजूद कांगे्रस हाई कमान ने राज्य में कांग्रेस की राजनीति को संतुलित करने की दिशा में बीरेन्द्र सिंह को राज्यसभा का टिकट देकर केंद्र की राजनीति में बुला लिया। कांग्रेस में हुड्डा गुट शायद अभी उस झटके से उबरा भी नहीं था कि कांग्रेस हाईकमान ने चौधरी बीरेन्द्र सिंह के कद को ऊंचा करते हुए उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति में महासचिव की जिम्मेदारी सौंप दी और साथ ही उन्हें तीन राज्यों का प्रभारी बना दिया, जो हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के लिए करारा झटका है। चौधरी बीरेन्द्र सिंह पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री सर छोटूराम के नाती है और हरियाणा में किसानों के लिए राजनीति में उन्हीं की राह पर चौधरी बीरेन्द्र सिंह भी अपने राजनीतिक कद को बनाये हुए हैं, जो उचानकलां से करीब छह बार विधायक रह चुके हैँ। कांग्रेस हाईकमान के निर्णय से निश्चित रूप से चौधरी बीरेन्द्र सिंह का राजनीतिक कद बढ़ा है।
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