कांग्रेस ने मांगी 98 सीटें, तृणमूल 58 सीट को तैयार
ओ.पी. पाल
देश में अगले महीने से पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में गठजोड़ को लेकर कांग्रेस की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं, अभी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-द्रमुक के बीच सीटों को बंटवारे को लेकर हुआ तनाव पूरी तरह से शांत भी नहीं हुआ था कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस में गतिरोध बढ़ता नजर आने लगा है। हालांकि पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी राजनीतिक पार्टियों में सीट बंटवारे को लेकर जारी घमासान वामपंथी दलों के भीतर भी मचा हुआ है।
पश्चिम बंगाल में 18 अप्रैल से 10 म
ई तक छह चरणों में होने वाले विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से भी सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस का तकरार सामने आने लगा है। अभी कांग्रेस किसी तरह तमिलनाडु में द्रमुक के साथ बिगड़ी बात को किसी तरह संभाल पाई है कि उसके सामने पश्चिम बंगाल विधानसभा सीटों के बंटवारे को लेकर मुश्किल खड़ी हो गई है। दरअसल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से तालमेल करके 98 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश कर रही है। हालांकि पहले से ही पश्चिम बंगाल कांग्रेस ईकाई के बड़े नेता कांग्रेस मुख्यालय में हाईकमान को अपनी रिपोर्ट देकर अवगत करा दिया था, वहीं पश्चिम बंगाल के कांग्रेस प्रभारी डा. शकील अहमद ने भी गत सोमवार को कोलकाता में राज्य ईकाई के साथ बैठक करके चुनावी रणनीति तैयार की और जहां कांग्रेस की राजनीतिक जमीन मजबूत बताई जा रही है उसके अनुसार कांग्रेस ने तृणमूल के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही बातचीत में 98 सीटों की मांग की है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में विजयी रहे कांग्रेस के छह सांसदों के क्षेत्र में पड़ने वाली विधानसभा सीटें कांग्रेस को देना चाहती है हालांकि उसके हिसाब से भी दस सीटें ज्याद यानि कुल 58 सीटें देने की बात कर रही है। कांग्रेस ने जहां 98 सीटों की मांग रखी, वहीं ममता सिर्फ 58 सीटें देना चाहती हैं। इससे जाहिर है कि तृणमूल कांग्रेस ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की 98 सीटों की मांग के बीच कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में 58 सीटें देने की पेशकश की है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव मुकुल राय के अनुसार उनकी पार्टी ने विधानसभा की कुल 294 सीटों में से 58 कांग्रेस को देने की पेशकश की है। केंद्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री ने कहा कि तृणमूल ने सीटों के बंटवारे को लेकर वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव और कोलकाता स्थानीय प्रशासन के चुनाव को आधार बनाने का सुझाव दिया है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल ने 19 सीटें जीती थी जबकि कांग्रेस को छह सीटों पर कामयाबी मिली थी। केंद्र में कांग्रेस के कदम से कदम मिलाकर चलने वाली टीएमसी भी सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस द्वारा की गई सीटों की मांग पर खफा है। कांग्रेस सूत्रों की माने तो कांग्रेस को इस बात पर आपत्ति है कि टीएमसी उसे वो सीटें दे रही है। जहां से कांग्रेस के प्रत्याशी जीत ही नहीं सकते हैं। वामदलों में भी सीट बंटवारे को लेकर धमासान मचा है।राज्य सरकार में मंत्री के पद पर तैनात लोग भी वैसी सीटों के लिए धमासान कर रहे हैं, जहां से वो आसानी से जीत सकें।
ओ.पी. पाल
देश में अगले महीने से पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में गठजोड़ को लेकर कांग्रेस की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं, अभी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-द्रमुक के बीच सीटों को बंटवारे को लेकर हुआ तनाव पूरी तरह से शांत भी नहीं हुआ था कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस में गतिरोध बढ़ता नजर आने लगा है। हालांकि पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी राजनीतिक पार्टियों में सीट बंटवारे को लेकर जारी घमासान वामपंथी दलों के भीतर भी मचा हुआ है।
पश्चिम बंगाल में 18 अप्रैल से 10 म
ई तक छह चरणों में होने वाले विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से भी सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस का तकरार सामने आने लगा है। अभी कांग्रेस किसी तरह तमिलनाडु में द्रमुक के साथ बिगड़ी बात को किसी तरह संभाल पाई है कि उसके सामने पश्चिम बंगाल विधानसभा सीटों के बंटवारे को लेकर मुश्किल खड़ी हो गई है। दरअसल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से तालमेल करके 98 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदारी पेश कर रही है। हालांकि पहले से ही पश्चिम बंगाल कांग्रेस ईकाई के बड़े नेता कांग्रेस मुख्यालय में हाईकमान को अपनी रिपोर्ट देकर अवगत करा दिया था, वहीं पश्चिम बंगाल के कांग्रेस प्रभारी डा. शकील अहमद ने भी गत सोमवार को कोलकाता में राज्य ईकाई के साथ बैठक करके चुनावी रणनीति तैयार की और जहां कांग्रेस की राजनीतिक जमीन मजबूत बताई जा रही है उसके अनुसार कांग्रेस ने तृणमूल के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही बातचीत में 98 सीटों की मांग की है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में विजयी रहे कांग्रेस के छह सांसदों के क्षेत्र में पड़ने वाली विधानसभा सीटें कांग्रेस को देना चाहती है हालांकि उसके हिसाब से भी दस सीटें ज्याद यानि कुल 58 सीटें देने की बात कर रही है। कांग्रेस ने जहां 98 सीटों की मांग रखी, वहीं ममता सिर्फ 58 सीटें देना चाहती हैं। इससे जाहिर है कि तृणमूल कांग्रेस ने अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की 98 सीटों की मांग के बीच कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में 58 सीटें देने की पेशकश की है। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव मुकुल राय के अनुसार उनकी पार्टी ने विधानसभा की कुल 294 सीटों में से 58 कांग्रेस को देने की पेशकश की है। केंद्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री ने कहा कि तृणमूल ने सीटों के बंटवारे को लेकर वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव और कोलकाता स्थानीय प्रशासन के चुनाव को आधार बनाने का सुझाव दिया है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल ने 19 सीटें जीती थी जबकि कांग्रेस को छह सीटों पर कामयाबी मिली थी। केंद्र में कांग्रेस के कदम से कदम मिलाकर चलने वाली टीएमसी भी सीटों के बंटवारे पर कांग्रेस द्वारा की गई सीटों की मांग पर खफा है। कांग्रेस सूत्रों की माने तो कांग्रेस को इस बात पर आपत्ति है कि टीएमसी उसे वो सीटें दे रही है। जहां से कांग्रेस के प्रत्याशी जीत ही नहीं सकते हैं। वामदलों में भी सीट बंटवारे को लेकर धमासान मचा है।राज्य सरकार में मंत्री के पद पर तैनात लोग भी वैसी सीटों के लिए धमासान कर रहे हैं, जहां से वो आसानी से जीत सकें।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें