समस्याओं पर होगा केंद्रीय मंत्री समूह का गठन
ओ.पी. पाल
भारतीय किसान यूनियन के प्रस्तावित नौ मार्च से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की चौतरफा नाकेबंदी करने के निर्णय को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ भाकियू प्रतिनिधि के साथ हुई वार्ता में किसानों की समस्याओं के लिए मंत्री समूह का गठन करने और किसानों की समस्याओं का समाधान करने के आश्वा
सन के बाद स्थगित कर दिया गया है।
देश में किसानों की लंबित समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नौ मार्च बुधवार को प्रस्तावित दिल्ली की नाकेबंदी करके सभी तरह की आपूर्ति ठप्प करने के निर्णय से सकते में आई केंद्र सरकार ने भाकियू प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव राकेश टिकैत के नेतृत्व में भाकियू प्रतिनिधि मंडल से प्रधानमंत्री आवास पर मुलाकात करके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने करीब दो घंटे बैठक करके किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की और किसानों की मांगों को जायज करार दिया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाकियू को आश्वासन दिया कि संसद बजट सत्र समाप्त होते ही 25 मार्च के बाद इस मामले पर कैबिनेट की बैठक बुलाई जाएगी, जिसके बाद इस मसले पर एक मंत्रीसमूह का गठन किया जाएगा। मंत्री समूह में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, उर्वरक मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश और योजना आयोग के उपाध्यक्ष सहित कई और मंत्रालयों के मंत्री शामिल करने के संकेत दिये गये। यह मंत्री समूह इस मामले पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसके बाद ही सरकार इस पर कोई निर्णय लेने के पक्ष में हो पाएगी। इस मौके पर भाकियू ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य, भूमि अधिग्रहण कानून, कृषि ऋण एवं कृषि उपकरण पर ब्याज दर घटाने, बीज विधेयक कानून, जैव परिवर्तित बीज, मुक्त व्यापार समझौता वार्ता, फसल बीमा योजना, किसानों की हेल्थ केयर बीमा योजना आदि समस्याओं के समाधान की मांग की गई है। इसके अलावा कृषि योजनाओं का लाभ केवल बड़े किसानों तक ही सीमित हो जाने, कृषि नीतियों के तहत केवल पूंजीवादी लोगों को ही इसका लाभ मिलने सहित तमाम मांगों पर विचार करने पर बल दिया। वहीं भाकियू ने पीएम को चेताया कि यदि शीघ्र ही कोई कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ेगा। फिलहाल प्रधानमंत्री के इस आश्वासन पर भाकियू ने अपने आंदोलन को स्थगित करने का फैसला किया है। भाकियू प्रतिनिधिमंडल में हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष दीवान चंद चौधरी, पंजाब के अजमेर सिंह लाखोवाल, उत्तराखंड के सतनाम सिंह चीमा, राकेश टिकैत, यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव चौ.युद्धवीर सिंह और कनार्टक राज्य रैयत संघ के अध्यक्ष केएस पुटनैय्या, यूपी के भाकियू अध्यक्ष दीवानचंद चौधरी, राजबीर सिंह आदि शामिल रहे।पीएम ने पूछी टिकैत की कुशल क्षेमभाकियू के पीआरओ धमेंद्र मलिक ने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किसान प्रतिनिधियों से वार्ता के दौरान भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत के स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी ली, जो आजकल सिसौली में बीमार चल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने महेन्द्र सिंह टिकैत को फोन करके उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा और कहा कि वह उन्हें देखने के लिए एक कार्यक्रम बनाने की सोच रहे हैं। दूरभाष पर चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत से बातचीत में प्रधानमंत्री ने उनके द्वारा किसानों के हितों के लिए किये जा रहे संघर्ष की भी सराहना की और कहा कि उनकी सरकार किसानों के हितों में योजनाएं बना रही है और वह किसानों की समस्याओं से पूरी तरह से जान रहे हैं।
ओ.पी. पाल
भारतीय किसान यूनियन के प्रस्तावित नौ मार्च से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की चौतरफा नाकेबंदी करने के निर्णय को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ भाकियू प्रतिनिधि के साथ हुई वार्ता में किसानों की समस्याओं के लिए मंत्री समूह का गठन करने और किसानों की समस्याओं का समाधान करने के आश्वा
सन के बाद स्थगित कर दिया गया है।देश में किसानों की लंबित समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन के नौ मार्च बुधवार को प्रस्तावित दिल्ली की नाकेबंदी करके सभी तरह की आपूर्ति ठप्प करने के निर्णय से सकते में आई केंद्र सरकार ने भाकियू प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव राकेश टिकैत के नेतृत्व में भाकियू प्रतिनिधि मंडल से प्रधानमंत्री आवास पर मुलाकात करके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने करीब दो घंटे बैठक करके किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की और किसानों की मांगों को जायज करार दिया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाकियू को आश्वासन दिया कि संसद बजट सत्र समाप्त होते ही 25 मार्च के बाद इस मामले पर कैबिनेट की बैठक बुलाई जाएगी, जिसके बाद इस मसले पर एक मंत्रीसमूह का गठन किया जाएगा। मंत्री समूह में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, उर्वरक मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश और योजना आयोग के उपाध्यक्ष सहित कई और मंत्रालयों के मंत्री शामिल करने के संकेत दिये गये। यह मंत्री समूह इस मामले पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसके बाद ही सरकार इस पर कोई निर्णय लेने के पक्ष में हो पाएगी। इस मौके पर भाकियू ने प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य, भूमि अधिग्रहण कानून, कृषि ऋण एवं कृषि उपकरण पर ब्याज दर घटाने, बीज विधेयक कानून, जैव परिवर्तित बीज, मुक्त व्यापार समझौता वार्ता, फसल बीमा योजना, किसानों की हेल्थ केयर बीमा योजना आदि समस्याओं के समाधान की मांग की गई है। इसके अलावा कृषि योजनाओं का लाभ केवल बड़े किसानों तक ही सीमित हो जाने, कृषि नीतियों के तहत केवल पूंजीवादी लोगों को ही इसका लाभ मिलने सहित तमाम मांगों पर विचार करने पर बल दिया। वहीं भाकियू ने पीएम को चेताया कि यदि शीघ्र ही कोई कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में किसानों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ेगा। फिलहाल प्रधानमंत्री के इस आश्वासन पर भाकियू ने अपने आंदोलन को स्थगित करने का फैसला किया है। भाकियू प्रतिनिधिमंडल में हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष दीवान चंद चौधरी, पंजाब के अजमेर सिंह लाखोवाल, उत्तराखंड के सतनाम सिंह चीमा, राकेश टिकैत, यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव चौ.युद्धवीर सिंह और कनार्टक राज्य रैयत संघ के अध्यक्ष केएस पुटनैय्या, यूपी के भाकियू अध्यक्ष दीवानचंद चौधरी, राजबीर सिंह आदि शामिल रहे।पीएम ने पूछी टिकैत की कुशल क्षेमभाकियू के पीआरओ धमेंद्र मलिक ने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किसान प्रतिनिधियों से वार्ता के दौरान भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत के स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी ली, जो आजकल सिसौली में बीमार चल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने महेन्द्र सिंह टिकैत को फोन करके उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा और कहा कि वह उन्हें देखने के लिए एक कार्यक्रम बनाने की सोच रहे हैं। दूरभाष पर चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत से बातचीत में प्रधानमंत्री ने उनके द्वारा किसानों के हितों के लिए किये जा रहे संघर्ष की भी सराहना की और कहा कि उनकी सरकार किसानों के हितों में योजनाएं बना रही है और वह किसानों की समस्याओं से पूरी तरह से जान रहे हैं।
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