गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे...

जेपीसी गठन के अलावा कोई विकल्प नहीं
ओ.पी. पाल
बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम पर जेपीसी के गठन को लेकर एक-दूसरे को झुकाने के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना रहे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए अब ‘सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे..’वाली कहावत को चरितार्थ करने का प्रयास किया जा रहा है, क्योकिं सवाल है संसद के बजट सत्र को सुचारू रूप से चलाये जाने का।
बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए संयुक्त समिति की जांच के लिए विपक्ष की एकजुटता के सामने जब गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार की कोई भी कवायद नाकाम हो रही है तो ऐसे में आगामी 21 रवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए कांग्रेसनीत यूपीए सरकार के सामने इस मुद्दे पर जेपीसी का गठन करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है, जिसके संकेत प्रणव मुखर्जी द्वारा मंगलवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद सत्ता और विपक्ष के नेताओं ने भी दिये, भले ही इसके लिए कोई भी फार्मूले पर इस तकरार को खत्म करने के लिए दोनों ही पक्ष एक-एक कदम आगे बढ़े हों। सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष भी चाहता है कि संसद का सत्र बिना किसी बाधा के चले और 2जी स्पेक्ट्रम पर जेपीसी का भी गठन हो जाये। इसके लिए लगता है कि इस सर्वदलीय बैठक में बीच का रास्ता निकला जा चुका है, जिसमें अभी तक सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी प्रतिष्ठा को बचाये रखने के लिए एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करते रहे हैं, लेकिन दोनों की प्रतिष्ठा भी बची रहे और जेपीसी का गठन हो सके, इसी के लिए शायद एक प्रस्ताव लाने पर भी सहमति बनी है जो गतिरोध को खत्म करने का बेहतर फार्मूला हो सकता है । हालाकि ऐसे संकेत पिछले सप्ताह ही कांग्रेस की प्रवक्ता जयंती नटराजन ने भी दे दिये थे। दूसरी ओर जेपीसी के गठन पर विपक्ष की एकजुटता के सामने बजट सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार बिना किसी प्रस्ताव को लाये बिना भी जेपीसी का गठन कर सकती है जिसके सामने गतिरोध को दूर करने का अब कोई विकल्प भी नहीं है। जहां तक बजट सत्र से एक पखवाड़ा पहले लोकसभा में सदन के नेता एवं वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा बुलाई गई इस सर्वदलीय बैठक में विपक्ष की एकजुटत को देखते हुए सत्ता पक्ष ही नहीं विपक्ष के नेताओं ने भी संकेत दिये हैं कि गतिरोध दूर होने के आसार बने हुए हैं। हालाकि ताजा सर्वदलीय बैठक में गतिरोध को तोड़ने के लिए फिलहाल तो कोई नतीजा सामने नहीं आया, लेकिन इसके आसार बनते जरूर नजर आये। अब सवाल है कि सरकार कौन सा फार्मूला अपनाती है जिसमें प्रस्ताव के जरिए भी जेपीसी के गठन पर वोटिंग को सरकार राजी है और सरकार की ओर से सामने आए फार्मूले से विपक्षी दल भी संतुष्ट दिख रहे हैं जिसका कारण है कि लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उम्मीद जताई है कि सत्र शुरू होने पर सरकार जेपीसी को स्वीकृति दे देगी और संसद की कार्यवाही चलेगी। उसी प्रकार माकपा नेता सीताराम येचुरी का भी कहना है कि सरकार अगर जेपीसी के बारे में सदन में प्रस्ताव लाना चाहती है तो हम उस पर चर्चा के लिए तैयार हैं। माना जा रहा है कि बजट सत्र शुरू होने से पहले एक और सर्वदलीय बैठकहोगी, जिसमें इस गतिरोध समाप्त करने के फार्मूले को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।