शनिवार, 26 मार्च 2011

आम लोगों पर रेल मंत्री की ममता!

यूपीए-2 का तीसरा रेल बजट
ओ.पी. पाल
यूपीए-2 का तीसरा रेल बजट कल शुक्रवार को ऐसे समय में पेश किया जाना है जब भारतीय रेल की माली हालत बुरे दौर से गुजर रही है, लेकिन इसी साल पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के कारण इस रेल बजटमें रेल आम लोगों पर फिर से ममता बरसाने से कतई नहीं चूकेंगी। मसलन आठवें साल भी यात्री किराये या अन्य किसी भाड़े में बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है, बल्कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में लालकिला को ध्वस्त कर टीएमसी का परचम लहराने की मुहिम को हवा देते हुए कई अन्य लोकलुभावन घोषणाओं का पिटारा भी खोल सकती हैं।
संसद के बजट सत्र में 25 फरवरी यानि कल शुक्रवार को रेल मंत्री ममता बनर्जी रेल बजट 2011-12 पेश करने जा रही है, जिसकी तैयारियों को रेलवे की खस्ता माली हालत के बावजूद चौतरफा बने दबाव को देखते हुए जनोन्मुखी रेल बजट के रूप में किये जाने की खबर है। रेल मंत्री पर जहां पश्चिम बंगाल समेत इसी साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का दबाव है तो वहीं दीदी के सामने अन्य कई ऐसी चुनौतियां हैं जिसमें वे पहले से घोषित कई रेल परियोजनाओं को दिशा नहीं दे सकी हैं इसका कारण वित्तीय संकट है। इस जवाबदेही की चुनौती के बावजूद संभावना है कि इस बार भी यात्री किराया बढ़ने की कोई संभावना नहीं है। जबकि एनएफआईआर रेलवे बोर्ड को रेलवे कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए रेल किराये में बढ़ोतरी का सुझाव दे चुका है। यह लगातार आठवां साल होगा जब रेल मंत्रालय यात्री किराये में परिवर्तन नहीं करेगा। रेल मंत्री ममता बनर्जी द्वारा लोकसभा में कल पेश किए जाने वाले रेल बजट में 100 नई रेलों का ऐलान किया जा सकता है इनमें से करीब एक दर्जन नॉन स्टॉप दूरंतों ट्रेनें शामिल रहेंगी। हालांकि पिछले साल घोषित दीदी की 'दूरंतो' को योजना आयोग ने रोकने का काम किया है जिसमें अभी तक 40 से ज्यादा ऐसी रेल परियोजनाएं रही जिसकी मंजूरी योजना आयोग ने नहीं दी और नहीं कोई दिलचस्पी दिखाई। यही कारण है कि रेल मंत्री ममता बनर्जी वर्ष 2011-12 के रेल बजट में अपनी कई पसंदीदा परियोजनाएं पेश करने के इरादे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से संपर्क साधा है। रेलवे मंत्रालय की माने तो योजना आयोग ने अब तक रेल बजट की 40 से ज्यादा परियोजनाओं वाली शुरूआती सूची में से केवल 11-12 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ऐसे में बनर्जी को आपात स्थिति में मंजूरी के लिए कोशिश करनी होगी। पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव से पहले यह बनर्जी का आखिरी बजट है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार पश्चिम बंगाल में बनर्जी को मुख्यमंत्री पद पर देखने के लिए काफी सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहे हैं। बनर्जी ने प्रणव मुखर्जी के साथ मंगलवार को लंबी बैठक की और उम्मीद हैं कि वित्त्त मंत्री भी पश्चिम बंगाल से होने के नाते रेलवे की माली हालत सुधारने के लिए अतिरिक्त बजटीय प्रावधान करेंगे। रेलवे के बीते वित्तीय वर्ष पर नजर डाले तो रेलवे को यात्री किराया, माल भाड़ा और अन्य स्रोतों से होने वाली आय का 95 प्रतिशत धन तो रेलवे कर्मचारियों के वेतनभत्तों और पेंशन पर ही खर्च हो जाता है जिसके कारण रेल परियोजनाओं के लिए केवल पांच प्रतिशत धन बचता है इसी लिए रेल मंत्री पर रेलवे को वित्तीय संकट से उबारने के लिए उस पर यात्री किराया और मालभाड़ा में वृद्धि करने का दबाव है लेकिन कुछ राजनीतिक मजबूरियों के कारण इस बार भी आम लोगों की जेबों पर किसी प्रकार के आर्थिक बोझ बढ़ने की कतई संभावनाएं नहीं हैं। इसके अलावा कल पेश किए जाने वाले 2011-12 के रेल बजट में सम्भवत मेट्रो शहरों में ब़डे रसोईघरों की स्थापना का भी उल्लेख भी होगा। इन रसोई घरों में प्रतिदिन 50,000 से एक लाख रेल यात्रियों के लिए भोजन तैयार किया जा सकता है। नई कैटरिंग नीति के अनुसार रेलवे खुद इन रसोईघरों की देखरेख का काम करेगी। लोगों की सहूलियत के लिए इस बजट में सभी जोन में एसएमएस हेल्पलाइन सर्विस के अलावा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का ऐलान हो सकता है। ट्रेनों में साफ सुथरे बिस्तर के लिए मैकेनाइल्ड लोंड्री लगाने की घोषणा भी हो सकती है। पेश किए जाने वाले रेल बजट में छात्र-छात्राओं के लिए रेल बजट में विशेष रेलगाड़ी की घोषणा हो सकती है। खासकर परीक्षाओं के दौरान छात्र-छात्राओं को इस तरह की विशेष ट्रेन की काफी जरूरत महसूस होती है। इसके अलावा ऐसी ट्रेन की घोषणा हो सकती है जिसमें सिर्फ तत्काल योजना के तहत टिकटों की बुकिंग होगी।

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