शनिवार, 12 मार्च 2011

संसदीय समिति ने भी उठाये पूर्वोत्तर में सवाल!

सबसे बड़ा 4.63 लाख करोड़ का घोटाला केंद्र सरकार की मुश्किलों का सबब
ओ.पी. पाल
पूर्वोत्तर राज्यों में केंद्रीय कोष के खर्च को लेकर संसद की स्थायी समिति भी सवालिया निशान लगा चुकी है, जो पूर्वोत्तर राज्यों में करोड़ो रुपये के घोटाले का खुलासा करने वाली भारतीय जनता पार्टी के दावों को मजबूत ही नहीं करता, बल्कि भ्रष्टाचार पर पहले से ही कठघरे में खड़ी कांग्रेसनीत यूपीए सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आने लगी हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन गडकरी ने पूर्वोत्तर राज्यों में हुए करीब 4.63 लाख करोड़ के घोटालों का सबूतों के साथ खुलासा किया है, जिसके लिए सांसद किरीट सौमया, तापिर गाओ, विद्या चक्रवर्ती आदि की कमेटी द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों में स्थलीय दौरे करने के बाद रिपोर्ट तैयार की गई है उसमें कम से कम 50 घोटालों का खुलासा किया गया है। इसमें अरुणाचल प्रदेश में चार लाख 20 हजार करोड़ रुपये की हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट तथा हाइड्रो किकबैक में तो वहां के मुख्यमंत्री ने अपनी पत्नी के नाम की कंपनी बनाकर उसे ही केंद्रीय योजनाओं की धनराशि जारी कर दी गई। सबसे आश्चर्य जनक बात यह रही है कि इस कंपनी का पंजीकरण 9 मार्च 2010 को हुआ और उसे हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट 11 जून यनि तीन माह बाद ही सौंप दिया गया। ऐसे ही घोटालों के दायरे में आसाम, मणिपुर, सिक्किम, नागालैंड व मिजोरम भी सामने है जिसमें करोड़ो के घोटाले हुए हैं। इन सभी राज्यों में कांग्रेस की ही सरकार है। जबकि कांग्रेसनीत यूपीए सरकार पहले से ही 2जी स्पेक्ट्रम, आदर्श सोसायटी और राष्ट्रमंडल खेलों में हुए गड़बड़झालों के चक्रव्यूह में फंसी हुई है। ऐसे में भाजप द्वारा कांग्रेस शासित पूर्वोत्तर राज्यों में 50 और नये घोटालों का खुलासा करने से केंद्र सरकार के साथ-साथ कांग्रेस भी कठघरे में आती नजर आ रही है। भाजपा अध्यक्ष नितीन गडकरी द्वारा नई दिल्ली में जैसे ही पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बिजोय चक्रवर्ती,महासचिव तापिर गाव तथा राष्ट्रीय सचिव डा. किरीट सोमया की भारी भरकम रिपोर्ट को जारी किया तो उसके कुछ घंटो बाद ही संसद की परिवहन, पर्यटन और संस्कृति पर संसद की स्थायी समिति ने भी यह कहते हुए भाजपा की रिपोर्ट में किये गये घोटालों के दावे को मजबूत करने का काम किया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए आवंटित किए गए केंद्रीय कोष का संतोषजनक खर्च नहीं किया गया। संसदीय समिति के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य सीताराम येचुरी ने यहां तक कहा कि केंद्रीय कोष का आवंटन तो किया जा रहा है लेकिन उसका खर्च संसदीय समिति के अनुरूप नहीं है जो संतोषजनक नहीं है। समिति की माने तो उसके 11 सदस्यों ने येचुरी के नेतृत्व में एक समीक्षा बैठक की और बाद में उन्होंने क्षेत्र में संपर्क और पर्यटन बढ़ाने की भी केंद्र सरकार से सिफारिश की है। पूवोत्तर राज्यों के घोटाले की रिपोर्ट जहां भाजपा राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को सौंपेगी और इस मुद्दे को संसद के बजट सत्र में उठाने का ऐलान कर चुकी है तो वहीं संसदीय समिति के अध्यक्ष येचुरी भी इस संबंध में एक रिपोर्ट तैयार करके संसद में पेश करेगी। पूर्वोत्तर राज्यों में 4.63 लाख करोड़ के घोटाले को आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला करार करते हुए कांग्रेसनीत सरकार को चौतरफा घेरने के लिए तैयार है, जबकि 1.76 लाख करोड़ के 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर विपक्ष ने पहले ही सरकार को घेरे हुआ है। ऐसे में यूपीए की केंंद्र सरकार की मुश्किलें ज्यादा बढ़ती नजर आ रही है।

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