शनिवार, 26 मार्च 2011

बंगाल में भी बिगड़ेगा कांग्रेस-तृणमूल गठजोड़ को खेल!

लोकसभा में कांग्रेस की जीत को आधार बनाएगी तृणमूल
ओ.पी. पाल
पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु समेत पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले देश की राजनीतिक गरमाने लगी है, जहां तमिलनाडु में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और द्रमुक का गठबंधन टूट गया है, वहीं इसकी आंच पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में सीटों के तालमेल पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के गठजोड़ पर भी पड़ सकती है।
यूपीए से अपना समर्थन वापस लेने का ऐलान करके देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही द्रमुक ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर बढ़े तकरार पर कांग्रेस के सामने राजनीतिक संकट पैदा कर दिया है। तमिलनाडु में केवल तीन सीटों को लेकर कांग्रेस और द्रमुक में तकरार हुआ,जिसे हालांकि कांग्रेस सुलझाने का प्रयास कर रही है। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में द्रमुक से टूटी सात साल पुरानी दोस्ती से राजनीतिक तौर पर मुश्किल में आई कांग्रेस का पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस के साथ गठजोड़ अभी असजंसज की स्थिति में है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच की खींचतान तो अब कोलकाता से निकलकर दिल्ली तक पहुंच चुकी है। जिस प्रकार तमिलनाडु में कांग्रेस सत्तारूढ दल द्रमुक से अधिक सीटें मांग रही थी, वहीं पश्चिम बंगाल की कुल 294 सीटों में से कांग्रेस एक-तिहाई यानी 98 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को चुनावी जंग में उतारना चाहती है, जबकि तृणमूल अपनी सहयोगी कांग्रेस को केवल 42 सीटें ही देना चाहती है, जहां पिछले कई सालों से तृणमूल कांग्रेस लालगढ़ को तोड़ने के लिए जमीनी राजनीतिक परिश्रम कर रही है। ऐसे में तृणमूल किसी भी कीमत पर कांग्रेस को उनकी मनमाफिक सीटें देना नहीं चाहेगी। इसलिए तमिलनाडु में हाल ही द्रमुक के साथ गठजोड़ का झटका झेल रही कांग्रेस के सामने पश्चिम बंगाल में तृणमूल से गठजोड़ पर मुश्किलें खड़ा कर सकता है। पश्चिम बंगाल के हाल ही में प्रभारी बनाये गये डा. शकील अहमद सीटों के बंटवारे पर कल सोमवार को राज्य के कांग्रेस नेताओं के साथ विचार-विमर्श करेंगे, हालांकि अंतिम रूप कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी को लेना है। इससे पहले पश्चिम बंगाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मानस भुइयां सहित दर्जनों वरिष्ठ नेता दिल्ली में डेरा जमाए हुए थे भी चुनावी रणनीति के लिए कोलकाता पहुंच गये हैं। पश्चिम बंगाल के कांग्रेस नेताओं ने कांग्रेस हाईकमान को राज्य में तृणमूल कांग्रेस से तालमेल करने का फार्मूला दिया है जिसमें एक तिहाई यानि 98 सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ना चाहती है, जिस पर शायद ही तृणमूल कांग्रेस प्रमुख कुमारी ममता राजी हो। इसलिए ऐसी संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि कांग्रेस ने तृणमूल से मनमाफिक सीटों की संख्या मांगी तो तमिलनाडु की तरह पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस को गठजोड़ पर संकट के बादल मंडरा सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में लोकसभा की तरह ही एक तिहाई सीटों के फार्मूले को विधानसभा में अजमाना चाह रही है, जिसमें कांग्रेस के हिस्से में 42 में से 14 लोकसभा सीटें आई थी, लेकिन कांग्रेस केवल छह सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी थी। इसी आधार पर तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को अधिक से अधिक 60 सीटों पर हिस्सेदारी देने के मूड़ में है। हालांकि जिस प्रकार तमिलनाडु में तीन सीटों को लेकर कांग्रेस का राजनीतिक समीकरण गड़बड़ाया है उसे ध्यान में रखकर पश्चिम बंगाल में कांग्रेसफूंक-फूंककर कदम बढ़ाना चाहेगी। मसलन यह कि सीटों के बंटवारे को लेकर पश्चिम बंगाल में भी तृणमूल व कांग्रेस का गठजोड़ अभी असमंजस के चक्रव्यूह में फंसा हुआ है जिसके बिगड़ने के संकेत अधिक नजर आ रहे हैं।

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