शनिवार, 26 मार्च 2011

आंकड़ो की बाजीगरी से नहीं भरेगा गरीबों का पेट

आम बजट पर चर्चा में बोले प्रभात झा
ओ.पी. पाल

आम बजट पर यूपीए सरकार को चौतरफा घेरते हुए भाजपा के सांसद प्रभात कुमार झा ने कहा कि जनता को आंकडों की बाजीगरी से गरीब की भूख और गरीबों का पेट नहीं भरा जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की 77 फीसदी गरीबी से नीचे जीवन यापन कर रहे परिवारों के लिए इस बजट में कुछ भी नहीं है। इसलिए आम बजट में प्रधानमंत्री और गठबंधन की मजबूरी साफ झलक रही है।
मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद प्रभात कुमार झा शुक्रवार को सदन में आम बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए बोल रहे थे। सदन में उन्होंने बजट पर प्रकाशित एक कार्टून का उदाहरण देते हुए कहा कि इस बजट में अमीरों को छोड़कर सभी वर्गो को आंसू रूलाया गया है। वित्त मंत्री को इंगित करते हुए उन्होंने कहा कि इस बजट में गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले 77 फीसदी लोगों के लिए कुछ भी नहीं दिया गया है। वहीं देश में 20-25 रुपये की मजदूरी करने वाले 52 करोड़ लोगों और 15 कुपोषित वर्ग को सरकार ने इस बजट में कुछ भी नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि भूमंडलीय विश्व में तमाम अनिश्चितताओं और तेजी से हो रहे परिवर्तनों के बीच आ रही चुनौतियों के बारे में कहा कि ऐसे में देश की जनता सामने आंकड़ो की बाजीगरी से सरकार गरीब की भूख और गरीब के पेट भरने वाला नहीं है। सरकार खाद्य सुरक्षा कानून बनाने की बात करती है, लेकिन बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं किया गया है। प्रभात झा ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में अलग-अलग भयंकर बीमारियों से ग्रसित लोगों के आंकड़े देते हुए कहा कि उनके लिए भी बजट में कुछ नहीं दिया गया। महिला, किसान और नौजवानों के लिए भी बजट में हिस्सा नहीं है तो वह सरकार से सवाल करते हैं? कि चौतरफा घोटालों और भ्रष्टाचार से घिरी यूपीए सरकार ने क्या आम बजट की की परंपरा का निर्वाह किया है? मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में किसानों की ताकत बढ़ाने के साथ उन्हें ऋण देने की घोषणा की तुलना में देश का बजट खास लोगों के लिए पेश किया गया है। देश में बढ़ती महंगाई के लिए यूपीए सरकार का उच्च विकास दर को दोषी ठहराना ही काफी नहीं है, जों अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों से भी साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सच तो यह है कि इस समय भारत में जो महंगाई का दौर चल रहा है उसका मूल उच्च विकास दर नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थो की मूल्य दर बढ़ने का कारण महंगाई है जिसे सरकार रोकने में विफल रही। सरकार की मनरेगा योजना पर हमला बोलते हुए प्रभात झा ने कहा कि इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार ने महात्मा गांधी के नाम को भी बदनाम करने का काम किया है, जिसमें इस योजना के नाम पर लूट खसोट चल रही है। सरकार के दावे के विपरीत आम बजट पोल खोल रहा है कि दलितों व आदिवासियों के लिए बजट में कुछ भी नहीं दिया गया है। देश की हालत क्या है यह सभी के सामने है केवल केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की बात कर ती है, लेकिन इस सेवा पर जीडीपी का एक प्रतिशत ही खर्च करती है। इसके लिए उन्होंने विश्व बैंक के एक आकलन का भी हवाला दिया। पिछले दो सालों से नेशनल डीजीज प्रोग्राम के अंतर्गत बजट आवंटन के लिए 14 प्रतिशत कटौती को प्रभात झा ने शर्मनाक करार देते हुए कहा कि यही कारण है कि देश में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चरमराई हुई है। उन्होंने सरकार से स्वास्थ्य सेवा कर को वापस लेने की मांग की। उन्होंने विभिन्न घोटालों और भ्रष्टाचार के अलावा विदेशों में जमा कालेधन पर भी यूपीए सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए सरकार को चेताया कि देश को मजबूत बनाने के लिए बजट भी मजबूत होना जरूरी है।

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