शनिवार, 26 मार्च 2011

आम आदमी के घरो का सपना हो पूरा

आम बजट: रियल एस्टेट को वित्त मंत्री से बहुत सी अपेक्षाएं
ओ.पी. पाल
देश में बढ़ती महंगाई से जूझते लोगों के घरो का सपना साकार हो सके ऐसी उम्मीदें लोगों को ही नहीं बल्कि रियल एस्टेट को भी यूपीए सरकार से लगी हुई है। प्रॉपर्टी डेवलपस भी प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों को देखते हुए उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार इस बजट में सस्ते घरों को और छूट दे सकती है, ताकि ग्राहक और मंदी से जूझ रहे प्रॉपर्टी सेक्टर दोनों को हीफायदा हो सके।
प्रॉपर्टी डेवलपर्स रियल एस्टेट क्षेत्र में सरकार से ऐसी उम्मीद ही नहीं बल्कि मांग भी कर रहे हैं। इसका कारण यह भी है कि बेलगाम बढ़ती कीमतें, गिरती बिक्री और लिक्वीडिटी की समस्या से जूझ रही रियल एस्टेट सेक्टर को यह भी डर सता रहा है कि 28 फरवरी को प्रस्तावित आम बजट में केंद्र सरकार इन कयासों पर रोक लगाने का कोई तरीका निकाल सकती है। ऐसा होता है तो कंज्यूमर फायदे में रहेगा। लेकिन इसका ये भी मतलब नहीं है की घर सस्ते हो जाएंगें। बिल्डरों को उम्मीद है कि इस बजट में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए कुछ खास करेंगे। सस्ते मकानों की सप्लाई बढ़ाना सरकार के फोकस में है और बजट में इसपर कुछ खास घोषणा हो सकती है। डेवलपर्स ने भी अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए सरकार के सामने रेसीडेंशियल सेज बनाने की मांग रखी है जहां उन्हें कुछ रियायतें मिलने की उम्मीद है। रियल एस्टेट से जुडे सुनील मंत्री का कहना है कि सरकार को छोटे मकानों को बढ़ावा देने के लिए एटीआईपी की नीति को लागू करना चाहिए, जिसमें उन्होंने सरकार से मांग की है कि रियल एस्टेट सेक्टर के लिए सरकार प्रायरिटी सेक्टर लेंडिंग की लिमिट 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दें। कर्ज को लेकर भी रियल एस्टेट कंपनियां मुश्किल में हैं और डेवलपर तथा बिल्डर चाहते हैं कि होम लोन पर छूट की सीमा भी बढ़ा दी जाए। डेवलपर ये भी चाहते हैं की रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाया जाए ताकि कमोडीटी की बढ़ती कीमतों का असर कम हो। डेवलपरों को उम्मीद है की उनकी इंडस्ट्री स्टेटस पाने की बरसों पुरानी मांग को पूरा करते हुए वित्तमंत्री उनकी इन्डस्ट्री को इंफ्राटक्चर का दर्जा देने की घोषणा करे। आयकर से छूट देकर छोटे मकानों को राहत देने की वकालत हीरानंदनी ग्रुप के निरजंन हीरानंदनी भी कर रहे हैं। उनका मानना है कि ब्याज दरें बढने पर इक्विटी में गिरावट देखने को मिलती है, डेट संपत्तियों और रियल एस्टेट का मूल्य घटता है। जबकि नाईट फ्रैंक लि.के प्रणय वकील का कहना है कि रियल एस्टेट के लिए सरकार की नीतियां साफ होनी चाहिए और उन्होंने प्रणव मुखर्जी से उम्मीद की है कि वे बजट में आपूर्ति बढ़ाने की नीति बनाकर रियल एस्टेट वर्ग की फंडिंग में आ रही मुश्किलों पर भी गौर करें जिसके लिए रिजर्व बैंक को भी ठोस विचार करने की जरूरत है। जेएलएल के सीईओ संजय दत्त का कहना है कि डेवलपरों को मुख्य दिक्कत फंडिंग को लेकर है जो सीमा से भी बहार नहीं जा रहे हैं इसलिए डेवलपरों को सरकार मौका देकर उनके सामने आने वाली समस्याओं पर गौर करेगी? इसके लिए उन्होंन फंडिंग के नियम को आसान बनाने के साथ सर्विस, एक्साईज, आयकर और अन्य करों को कम करने पर विचार करने की आवश्यकता है। डेवलपरों को खुदरा क्षेत्र में भी बजट से कई अपेक्षाएं हैं। इसके लिए उन्होंने सर्वे का जिक्र किया जिसमें 28 फीसदी लोग सस्ते घरों के लोन पर 2 फीसदी की सब्सिडी जारी रखने के पक्ष में हैं। वहीं 24 फीसदी का मानना है कि सस्ते घरों के लोन पर 2 फीसदी सब्सिडी जारी रही तो वो लोग सालभर में घर खरीदने के लिए तैयार हैं। साथ ही 21 फीसदी लोग घर खरीदने के बाद 3 साल तक घर न बेचने के पक्ष में हैं। इस सर्वे में 16 फीसदी लोगों का मानना है कि बजट में होमलोन पर टैक्स छूट बढ़ी तो वे लोग साल भर में घर खरीदने को तैयार हैं। वहीं 24 फीसदी लोग चाहते हैं कि होमलोन पर ब्याज की टैक्स छूट को बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जाना चाहिए। 44 फीसदी लोगों का मानना है कि बजट में हाउसिंग सेक्टर के लिए अच्छी खबरें आने की गुंजाइश नहीं है। 55 फीसदी लोगों का मानना है कि बजट के बाद होमलोन का महंगा होना तय है। डेवलपर चाहते हैं कि आम आदमी के घरों का सपना पूरा हो और रियल एस्टेट भी इस सपने में अपना योगदान दे सके इसके लिए वित्तमंत्री से उम्मीद है कि वे आम बजट में इस दिशा में उनके द्वारा उठाई जा रही मांगों पर बजट में गौर करेंगे।

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