शनिवार, 12 मार्च 2011

मुस्लिम आरक्षण पर केंद्रीय मंत्रियों में मतभेद!

मुस्लिमों और दलित ईसाईयों को आरक्षण का मामला
ओ.पी. पाल
देश में मुस्लिमों और दलित ईसाईयों को आरक्षण देने के मुद्दे पर पिछले लंबे समय से बहस छिड़ी हुई है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के लिए यह मामला विचाराधीन है, लेकिन केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलो और विधि मंत्रालय इस मुद्दे पर आमने सामने नजर आ रहे हैं। जबकि सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में भी सांसद इस मामले को उठाते रहे हैं।
राज्यसभा में मुस्लिमों और ईसाईयों को आरक्षण देने के लिए सच्चर समिति द्वारा केंद्र सरकार से की गई सिफारिशों को लागू करने के लिए जद-यू के सांसद अनवर अली अंसारी लगभग संसद के हर सत्र में विशेष उल्लेख पर चर्चा के दौरान मामला उठाते रहे हैं लेकिन लंबे समय से मुस्लिमों और दलित ईसाईयों को आरक्षण देने के मामले पर लगातार जारी बहस के बीच केंद्र सरकार के दो केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद तथा वीरप्पा मोइली की अलग-अलग राय के कारण यह मामला अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। मुस्लिमों और दलित ईसाईयों को आरक्षण देने को लेकर दोनों मंत्रालय ही एक-दूसरे के विरोध में खड़े नजर आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार के कुछ मंत्री तो आरक्षण की पुरजोर वकालत कर रहे हैं तो कुछ मंत्री ऐसे भी हैं जो कि इस आरक्षण के खिलाफ हैं। विरोध करने वाले मंत्रियों का तर्क है कि अभी तक सरकार के पास इन समुदायों के लोगों की निश्चत संख्या ही नहीं है तो आरक्षण की बात करना बेमानी होगा। सूत्रों की माने तो राजनीतिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीपीए) में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद और कानून मंत्री वीरप्पा मोइली मुस्लिम आरक्षण के पक्ष में थे लेकिन गृह मंत्री पी. चिदंबरम और मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने तर्क दिए कि अभी जनगणना चल रही है। सरकार के पास जनगणना के बाद मुस्लिम और दलित ईसाई समुदाय के लोगों की सही संख्या उपलब्ध होगी। उसके बाद ही आरक्षण के बारे में फैसला किया जाना चाहिए। मंत्रियों की विभाजित राय के चलते ही कैबिनेट समिति ‘सीसीपीए’ ने इस मामले को फिलहाल टाल दिया है। हालांकि यह मामला अदालत में भी है। केंद्रीय मंत्रालयों के आमने सामने होने तथा मामले के अदालत में विचाराधीन होने के कारण माना जा रहा है कि अब जनगणना के पूरे आंकड़े आने के बाद ही सरकार कोई फैसला लेगी, लेकिन आगामी 24 फरवरी को अदालत में होने वाली सुनवाई पर भी इस मुद्दे को लेकर नजरे लगी है, जिसमें संभावना है कि जनगणना की प्रक्रिया जारी होने के कारण केंद्र सरकार अदालत से इस मामले में और समय लेने का भी अनुरोध कर सकती है।

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