शनिवार, 26 मार्च 2011

द्रमुक को मनाने में जुटी कांग्रेस

सोनिया से मिलकर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने बनाई रणनीति
ओ.पी. पाल

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सीटों को लेकर हुए तकरार के बाद द्रमुक द्वारा यूपीए से अपना समर्थन वापस लेने से राजनीतिक संकट में आई कांग्रेस ने अभी उम्मीद नहीं छोड़ी है और द्रमुक को मनाने की कवायद करते हुए तमिलनाडु के महासचिव प्रभारी एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलामनबी आजाद को द्रमुक नेताओं से बातचीत करने के लिए चेन्नई भेजा है ताकि सोमवार में द्रमुक के मंत्रियों के इस्तीफा देने की योजना से पहले कोई सुलह हो सके।यूपीए से अपना समर्थन वापस लेने से राजनीतिक संकट में आई कांग्रेस ने द्रमुक को मनाने के लिए पार्टी महासचिव गुलाम नबी आजाद को द्रमुक नेताओं के साथ बातचीत के लिए चेन्नई भेजा है, जबकि द्रमुक ने यह भी ऐलान कर दिया है कि उसके सभी मंत्री केंद्रीय मंत्रिमंडल से सोमवार को प्रधानमंत्री को अपने सामूहिक इस्ताफा सौंप देंगे। हालांकि यूपीए सरकार पर किसी प्रकार के खतरे की संभावना से इंकार करते हुए द्रमुक का कहना है कि उसके छह मंत्रियों के इस्तीफे के बाद भी उनका दल केंद्र की यूपीए सरकार को मुद्दे पर आधारित समर्थन देता रहेगा। ऐसा ही समाजवादी पार्टी ने भी कह दिया है कि देश को मध्यावधि चुनाव में नहीं जाने दिया जाएगा। हालांकि कांग्रेस के साथ बातचीत को लेकर द्रमुक के वरिष्ठ नेता टीआर बालू ने कहा कि कांग्रेस ने अभी तक उनसे संपर्क नहीं किया है, जबकि कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार कांग्रेस महासचिव प्रभारी गुलामनबी आजाद द्रमुक नेताओं से बातचीत के लिए चेन्नई पहुंचे हुए हैं। जहां तक द्रमुक के केंद्रीय मंत्रियों के सोमवार को इस्तीफा देने का सवाल है उस पर कांग्रेस पार्टी ने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया। हालांकि सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रविवार को पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी से मिलकर कोई बीच का रास्ता निकालने की रणनीति बनाकर द्रमुक को मनाने के अभियान में जुटे हुए हैं। 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले मुद्दे पर राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो द्रमुक और यूपीए के बीच विवाद सीटों की वजह से नहीं है, असल में यह 2जी घोटाले की जांच कीवजह से टकराव की स्थिति बनी है। राजनीतिक विश्ेषकों का मानना है कि इस स्थिति में कांग्रेस समजावादी पार्टी से समर्थन मांगने के बारे में संकेत पहले ही दे चुकी है। क्योंकि समाजवादी पार्टी के 22 सदस्य लोकसभा में हैं। द्रमुक का समर्थन खोना कांग्रेस के लिए इस वजह से चिंता जनक है क्योंकि बजट अधिवेशन चल रहा है और अगर बजट को बहुमत से पारित नहीं किया जाता तो सरकार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। सरकार के लिए दूसरी मुश्किल यह है कि वह एक के बाद एक घोटाले में फंसती जा रही है, जिससे जनसमर्थन कमजोर हुआ है। माना जा रहा है कि 2जी घोटाले का फंदा डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि और उनके परिवारजनों को भी अपने चपेट में ले सकता है इसी कारण द्रमुक ने कांग्रेस नीत यूपीए सरकार पर दबाव बनाने के इरादे से यूपीए से समर्थन वापसी की घोषणा की है। दूसरी ओर विपक्ष इस नई घटना को कांग्रेस की प्रमुखता में यूपीए सरकार की बढ़ती कमजोरी के रूप में देख रहे हैं। भाजपा नेता अरुण जेटली का कहना है कि यूपीए गठबंधन में दरारें पड़ रही है जिसमें कांग्रेस और द्रमुक अपने आप ही एक-दूसरे पर भारी पड़ रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस घटनाक्रम पर कहा किफिलहाल द्रमुक से वार्ता जारी है तथा इस हालात में भी सीटों के बंटवारे पर समझौता हो सकता है। ऐसे भी संकेत हैं कि कांग्रेस की ओर से वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी करुणानिधि से बातचीत कर सकते हैं।

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