शनिवार, 12 मार्च 2011

चुनावी पटरी पर दौड़ेगी ममता की रेल?

रेल बजट: रेल मंत्री पर होगा चौतरफा दबाव
ओ.पी. पाल

रेल मंत्री कुमारी ममता बनर्जी के पिटारे में इस बार रेल बजट में कितनी ममता रहेगी इसका तो संसद के बजट सत्र में 25 फरवरी को पेश किये जाने वाले रेल बजट ही बताएगा, लेकिन एक तस्वीर तो सामने नजर आ रही है कि पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा में सत्ता पर काबिज होने की राजनीति में रेल मंत्री की ममता लालगढ़ की पटरी पर दौड़ने की ज्यादा संभावनाएं हैं।
देश के पांच राज्यों में इस साल प्रस्तावित विधानसभा चुनावों का दबाव भी रेल बजट पर होना स्वाभाविक है जिसमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है, जहां ममता बनर्जी ‘लालगढ़’ को फतह करके मुख्यमंत्री बनने का ख्वा पाले बैठी हैं। गरीबों की हिमायती रही रेल मंत्री ममता बनर्जी को हालांकि महंगाई से बिलबिला रही जनता का भी ख्याल है जिससे तय है कि शायद इस बार भी वह यात्री किराये में बढ़ोतरी करने वाली नहीं हैं। आगामी पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के अलावा महंगाई तथा दूसरी ओर लगातार बढ़ रही रेल दुर्घटनाओं के कारण बढ़े दबाव में इस बार ममता को रेल बजट के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस बजट को अंतिम रूप देने से पहले रेल मंत्री ममता बनर्जी पर हालांकि आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को देखते हुए यूपीए का दबाव भी है, जिसके लिए वह रेलवे बोर्ड, रेल फेडरेशनों और दूसरी सलाहकार समितियों के साथ बैठकें करके उनके सुझाव हासिल कर चुकी हैँ। जहां तक यूपीए सरकार के दबाव का सवाल है उसमें योजना आयोग और वित्त मंत्रालय आर्थिक ढांचें को मजबूत करने के लिए ऊंचे और सामान्य दर्जे का किराया बढ़ाने के समर्थन में हैं और नेशनल फेडरेशन आफ इंन्डियन रेलवेमेन के महासचिव एम. राघवैया भी रेलकर्मचारियों के हित में इस तर्क को हवा दे रहे हैं, जिन्होंने रेलवे में ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर विभागीय प्रणाली अपनाने का सुझाव दिया है जिससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बढ़ाया जा सके। लेकिन अभी तक तो लगता है कि रेल मंत्री इसके लिए तैयार नहीं हैं। रेल बजट को लेकर वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के अलावा रेल मंत्री ममता बनर्जी कांग्रेस और यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी से भी मुलाकात कर चुकी है, जिसमें माना गया है कि ममता पश्चिम बंगाल के साथ अन्य चार राज्यों के आगामी चुनाव की पटरी पर भी रेल बजट की गाड़ी चलाने पर सहमति हासिल कर चुकी है। ममता बनर्जी ने पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के हल्दिया में घोषणा की थी कि अगले छह महीनों में रेलवे ढाई से तीन लाख लोगों की रेलवे में भर्ती करेगा। जबकि रेलवे के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि रेलवे में सभी भर्तीयों को 30 मार्च तक भर दिया जाएगा, जिसे एनएफआईआर भी मान चुका है। रेल बजट में ममता बनर्जी के सामने देश में रेलगाडियों के संचालन में विलंब, रेल संरक्षा व सुरक्षा तथा गाड़ियों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्त की चिंता भी रहेगी कि कैसे इस व्यवस्था को सुधारा जाये, जो इस लिहाज से भी भारतीय रेलवे की प्रतिष्ठा का सवाल है कि भारत में रेलवे का कारोबार एशिया में सबसे बड़ा है। सूत्रों की माने तो इस बार का बजट तैयार करने वाले नीतिकारों ने इन चिंताओं के साथ रेल सुरक्षा और संरक्षा के साथ रेल परिचालन को आधुनिक रूप देने के कई सारे प्रावधानों पर जोर दिया है, जिसमें ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों में साफ-सफाई का भी जिक्र शामिल होगा। इन सभी पहलुओं को देखते हुए कैसा होगा रेल बजट इस पर ममता बनर्जी की परख और प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी।

कोई टिप्पणी नहीं: