कांग्रेस़ को 63 सीटें देने पर हुई सहमत
ओ.पी. पाल
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर द्रमुक व कांग्रेस में हुआ तकरार आखिर थम ही गया, जिसमें कांग्रेस के सामने झुकते हुए द्रमुक ने उसे उनके मनमाफिक 63 सीटें छोड़ने की घोषणा कर दी है। कांग्रेस और द्रमुक के बीच तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सीटों के तालमेल पर कांग्रेस के रूख का विरोध करते हुए द्रमुक ने यूपीए से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया था, तभी से कांग्रेस ने तेजी से बढ़ते इस घटनाक्रम में कांग्रेस की बेचैनी इतनी बढ़ गई थी कि वह लगातार द्रमुक को मनाने के लिए अभियान चलाए हुए थी और लगातार द्रमुक नेताओं से वार्ता का दौर भी जारी रहा था। आखिर मंगलवार को कांग्रेस व द्रमुक के बी
च टकराव टल ही गया और एक तरह से द्रमुक को ही झुकने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह कहना तो मुश्किल है कि द्रमुक अपने निर्णय पर तीन दिन बाद ही किस दबाव में पलटकर कांग्रेस के सामने झुककर कांग्रेस को विधानसभा में 63 सीटें देने को तैयार हो गई है। तमिलनाडु में मंगलवार के महत्वपूर्ण समझौते के बाद यह तो साफ हो गया कि अब तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रमुकगठजोड़ करके चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस-द्रमुक के बीच टकराव को दूर करने के लिए तमिलनाडु के प्रभारी महासचिव एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नवी आजाद ने अहम भूमिका निभाई है, तो वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को भी इस टकराव को दूर करने के लिए खासी कसरत करनी पड़ी है। कांग्रेस व द्रमुक के बीच हुए इस राजनीतिक समझौते की पुष्टि केंद्रीय मंत्री गुलामनबी आजाद ने की है, जिसके अनुसार तमिलनाडु में द्रमुक के साथ मिलकर कांग्रेस 63 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इस समझौते से जाहिर है कि द्रमुक पर कांग्रेस अपना दबाव बनाने में सफल रही और पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार काग्रेस की सीटों की मांग में 15 सीटों की बढ़ोतरी हुई है। 2006 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 48 सीटों पर किस्मत आजमाई थी। समझौते की घोषणा से पहले द्रमुक नेता और केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन ने मंगलवार को भी संसद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी से दूसरे दौर की बातचीत की, जिसमें आजाद तथा सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल भी मौजूद थे।
ओ.पी. पाल
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर द्रमुक व कांग्रेस में हुआ तकरार आखिर थम ही गया, जिसमें कांग्रेस के सामने झुकते हुए द्रमुक ने उसे उनके मनमाफिक 63 सीटें छोड़ने की घोषणा कर दी है। कांग्रेस और द्रमुक के बीच तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सीटों के तालमेल पर कांग्रेस के रूख का विरोध करते हुए द्रमुक ने यूपीए से समर्थन वापस लेने का ऐलान कर दिया था, तभी से कांग्रेस ने तेजी से बढ़ते इस घटनाक्रम में कांग्रेस की बेचैनी इतनी बढ़ गई थी कि वह लगातार द्रमुक को मनाने के लिए अभियान चलाए हुए थी और लगातार द्रमुक नेताओं से वार्ता का दौर भी जारी रहा था। आखिर मंगलवार को कांग्रेस व द्रमुक के बी
च टकराव टल ही गया और एक तरह से द्रमुक को ही झुकने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह कहना तो मुश्किल है कि द्रमुक अपने निर्णय पर तीन दिन बाद ही किस दबाव में पलटकर कांग्रेस के सामने झुककर कांग्रेस को विधानसभा में 63 सीटें देने को तैयार हो गई है। तमिलनाडु में मंगलवार के महत्वपूर्ण समझौते के बाद यह तो साफ हो गया कि अब तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रमुकगठजोड़ करके चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस-द्रमुक के बीच टकराव को दूर करने के लिए तमिलनाडु के प्रभारी महासचिव एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नवी आजाद ने अहम भूमिका निभाई है, तो वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को भी इस टकराव को दूर करने के लिए खासी कसरत करनी पड़ी है। कांग्रेस व द्रमुक के बीच हुए इस राजनीतिक समझौते की पुष्टि केंद्रीय मंत्री गुलामनबी आजाद ने की है, जिसके अनुसार तमिलनाडु में द्रमुक के साथ मिलकर कांग्रेस 63 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इस समझौते से जाहिर है कि द्रमुक पर कांग्रेस अपना दबाव बनाने में सफल रही और पिछले चुनाव की अपेक्षा इस बार काग्रेस की सीटों की मांग में 15 सीटों की बढ़ोतरी हुई है। 2006 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 48 सीटों पर किस्मत आजमाई थी। समझौते की घोषणा से पहले द्रमुक नेता और केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन ने मंगलवार को भी संसद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी से दूसरे दौर की बातचीत की, जिसमें आजाद तथा सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल भी मौजूद थे।
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