2जी स्पेक्ट्रम पर तल्ख होता तकरार
ओ.पी. पाल
बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम आबंटन घोटाले की जांच के लिए गठित एक सदस्य जस्टिस शिवराज पाटिल समिति की रिपोर्ट में सामने आये तथ्यों को देखें तो यूपीए सरकार इस मामले में भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार को भी लपेटे में लेने की तैयारी में है। पिछले सप्ताह पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शिवराज पाटिल द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम की जांच रिपोर्ट दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को सौंपी है, जिसमें वर्ष 2001 से 2008 के बीच दूरसंचार नीति की समीक्षा के लिए गठित की गई इस समिति की रिपोर्ट में राजग शासन काल का भी जिक्र किया गया है जिसे यूपीए सरकार इस मामले में हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है।
दूरसंचार मंत्री कपिल
सिब्बल के मुताबिक रिपोर्ट में शिवराज पाटिल की इस रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है कि राजग सरकार की पहले आओ पहले पाओ की नीति ही इस मामले की असली जड़ है जिसके कारण 2जी स्पेक्ट्रम आबंटन में ये सारी गड़बड़ी हुई है। कपिल सिब्बल का भी कहना है कि ए राजा दूरसंचार मंत्री रहते हुए हमेशा पिछली सरकार की दूरसंचार नीतियों का पालन करने की बात पहले से ही कहते रहे हैं। यूपीए सरकार पाटिल की रिपोर्ट को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यह साबित करने का भी प्रयास कर ही है कि दूरसंचार में पिछली नितियां ही गलत थी, जिसको यूपीए सरकार ने भी अपनाया है। सिब्बल ने साफ कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली राजग सरकार ने ही गलत नीतियां बनाईं थी, जिनके आधार पर ही बाद में यूपीए सरकार में इसी नीति के आधार पर 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन किया गया। सिब्बल ने तो यह भी आरोप लगाया है कि ये नीतियां तैयार करते समय राजग सरकार ने ट्राई से भी संपर्क करने का कोई प्रयास नहीं किया और न ही उससे सुझाव लेने की जहमत उठाई गई। सिब्बल ने कहा कि पूर्व न्यायाधीश पाटिल समिति की इस रिपोर्ट में आई बातों को भी मामले की जांच कर रही सीबीआई के साथ साझा किया जाएगा। यदि कोई जिम्मेदार है या उसने जान बूझकर गलत नीतियां तय की हैं तो सीबीआई संज्ञान में लेकर उसकी भी जांच करेगी और कानून अपना काम करेगा। दूसरी ओर सिब्बल के आरोपों की प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा है कि वह सिब्बल के किसी भी तर्क से सहमत नहीं है और इसका जवाब वह संसद में देंगी और जो सिब्बल कह रहे हैं उसमें कहीं तक भी कोई सच्चाई नहीं हैं। गौरतलब है कि इससे पहले कपिल सिब्बल ने 2जी स्पेक्ट्रम में 1.76 लाख करोड़ के सरकारी नुकसान को उजागर करने वाली कैग पर भी सवाल उठाकर विवादों में आ चुके हैं, जिसके लिए सिब्बल की विपक्ष में चौतरफा आलोचना भी हुई। जबकि कांग्रेस सिब्बल के बचाव में नजर आई। सुषमा स्वराज ने कहा कि कांग्रेस और उनके नेतृत्व वाली यूपीए सरकार इस तरह के तर्क देकर विपक्ष का जेपीसी की मांग से ध्यान हटाना चाहती है, लेकिन विपक्ष अपनी जेपीसी की मांग पर अड़िग है जिसके गठन न होने पर भी संसद में सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
ओ.पी. पाल
बहुचर्चित 2जी स्पेक्ट्रम आबंटन घोटाले की जांच के लिए गठित एक सदस्य जस्टिस शिवराज पाटिल समिति की रिपोर्ट में सामने आये तथ्यों को देखें तो यूपीए सरकार इस मामले में भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार को भी लपेटे में लेने की तैयारी में है। पिछले सप्ताह पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शिवराज पाटिल द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम की जांच रिपोर्ट दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को सौंपी है, जिसमें वर्ष 2001 से 2008 के बीच दूरसंचार नीति की समीक्षा के लिए गठित की गई इस समिति की रिपोर्ट में राजग शासन काल का भी जिक्र किया गया है जिसे यूपीए सरकार इस मामले में हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है।
दूरसंचार मंत्री कपिल
सिब्बल के मुताबिक रिपोर्ट में शिवराज पाटिल की इस रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है कि राजग सरकार की पहले आओ पहले पाओ की नीति ही इस मामले की असली जड़ है जिसके कारण 2जी स्पेक्ट्रम आबंटन में ये सारी गड़बड़ी हुई है। कपिल सिब्बल का भी कहना है कि ए राजा दूरसंचार मंत्री रहते हुए हमेशा पिछली सरकार की दूरसंचार नीतियों का पालन करने की बात पहले से ही कहते रहे हैं। यूपीए सरकार पाटिल की रिपोर्ट को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यह साबित करने का भी प्रयास कर ही है कि दूरसंचार में पिछली नितियां ही गलत थी, जिसको यूपीए सरकार ने भी अपनाया है। सिब्बल ने साफ कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली राजग सरकार ने ही गलत नीतियां बनाईं थी, जिनके आधार पर ही बाद में यूपीए सरकार में इसी नीति के आधार पर 2जी स्पेक्ट्रम का आवंटन किया गया। सिब्बल ने तो यह भी आरोप लगाया है कि ये नीतियां तैयार करते समय राजग सरकार ने ट्राई से भी संपर्क करने का कोई प्रयास नहीं किया और न ही उससे सुझाव लेने की जहमत उठाई गई। सिब्बल ने कहा कि पूर्व न्यायाधीश पाटिल समिति की इस रिपोर्ट में आई बातों को भी मामले की जांच कर रही सीबीआई के साथ साझा किया जाएगा। यदि कोई जिम्मेदार है या उसने जान बूझकर गलत नीतियां तय की हैं तो सीबीआई संज्ञान में लेकर उसकी भी जांच करेगी और कानून अपना काम करेगा। दूसरी ओर सिब्बल के आरोपों की प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा नेता सुषमा स्वराज ने कहा है कि वह सिब्बल के किसी भी तर्क से सहमत नहीं है और इसका जवाब वह संसद में देंगी और जो सिब्बल कह रहे हैं उसमें कहीं तक भी कोई सच्चाई नहीं हैं। गौरतलब है कि इससे पहले कपिल सिब्बल ने 2जी स्पेक्ट्रम में 1.76 लाख करोड़ के सरकारी नुकसान को उजागर करने वाली कैग पर भी सवाल उठाकर विवादों में आ चुके हैं, जिसके लिए सिब्बल की विपक्ष में चौतरफा आलोचना भी हुई। जबकि कांग्रेस सिब्बल के बचाव में नजर आई। सुषमा स्वराज ने कहा कि कांग्रेस और उनके नेतृत्व वाली यूपीए सरकार इस तरह के तर्क देकर विपक्ष का जेपीसी की मांग से ध्यान हटाना चाहती है, लेकिन विपक्ष अपनी जेपीसी की मांग पर अड़िग है जिसके गठन न होने पर भी संसद में सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
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