शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

पीएसी की जांच में मनरेगा को झटका!

कैग फिर से करेगा खामियों की सघन जांच
ओ.पी. पाल
संसद की लोक लेखा समिति द्वारा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से मनरेगा में पाई जा रही खामियों पर फिर से स्थलीय एवं बारीकी से अध्ययन करने का फरमान जारी किया गया है। जबकि एक दिन पहले ही मनरेगा के पांच साल होने पर मनाये गये समारोह में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानि मनरेगा को यूपीए सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि करार दिया, तो ऐसे में यूपीए की इस उपलब्धि को एक गहरा झटका माना जा सकता है जिसमें एक बार फिर से कैग इस मुद्दे की जांच करेगी।
कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ने पांच साल पहले देशभर में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के रूप में एक कानून लागू किया था, जिसमें 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है। इस कानून में खामियां और भ्रष्टाचार की शिकायतों की हुई भरमार के बाद इसकी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानि कैग द्वारा जांच रिपोर्ट के आधार पर संसद की लोक लेखा समिति कर रही है। भाजपा के सांसद डा. मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली संसद की लोक लेखा समिति की गुरुवार को हुई बैठक में मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में कहीं अधिक खामियों की आशंका जताते हुए यह निर्णय लिया है कि इसकी जांच और अधिक गहराई से कराई जाये, जिसके लिए पीएसी ने कैग से मनरेगा की और अधिक सघनता के साथ फिर से जांच करने को कहा है। पीएसी चेयरमैन डा. जोशी का मत है कि केंद्र से इस योजना के लिए धन राज्यों को जाता है और जांच में पाया गया है कि कुछ राज्यों को यह भी मालूम नहीं कि केंद्र से इस मद में कितना धन आया और कहां-कहां खर्च हुआ, जिसके कारण कुछ राज्यों के विभिन्न क्षेत्रों में मनरेगा जैसी योजना के धन का दुरुपयोग होने की अधिक शिकायतें आ रही हैं। इसलिए कैग को फिर से विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए गहनता के साथ जांच को अतिशीघ्र करने को कहा गया है। इसी प्रकार मानव संसाधन मंत्रालय की जारी मिड डे मिल योजना की भी कैग फिर से उसी गहनता के साथ जांच करेगी, जिसमें धांधलियों तथा भारी खामियों की आशंका जताई जा रही है। संसद की लोक लेखा समिति द्वारा मनरेगा और मिड डे मिल योजना की एक मत के साथ फिर से जांच करने से यूपीए सरकार को एक बड़ा झटका माना जा रहा है खासकर मनरेगा की उपलब्धियों को लेकर। मनरेगा के पांच साल पूरे होने पर बुधवार दो फरवरी को ही एक सम्मेलन में प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह ने मनरेगा को यूपीए सरकार की सफलता और इस योजना को सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक करार दिया था। मनरेगा जैसी योजना को और अधिक बुलंदियों पर ले जाने के लिए प्रधानमंत्री ने जहां श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया, वहीं मंत्रालय को कई अन्य महत्वपूर्ण सुझाव दिये। ऐसे में लोक लेखा समिति द्वारा कैग रिपोर्ट के आधार पर की जा रही जांच में मनरेगा में कहीं अधिक खामियों की आशंका जताते हुए फिर से जांच कराने का फरमान यूपीए सरकार द्वारा उपलब्धियों के रूप में पीटे जा रहे ढ़ोल को करारा झटका माना जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि मनरेगा पर संसद में सरकार द्वारा एक्शन टेकन रिपोर्ट भी पेश की जा चुकी है।

कोई टिप्पणी नहीं: