शनिवार, 5 फ़रवरी 2011

डीम्ड विश्वविद्यालयों पर संकट बरकरार

सुप्रीम कोर्ट तीन मई को सुनाएगी अंतिम फैसला
ओ.पी. पाल
देश में 44 डीम्ड यूनिवर्सिटी को काली सूची में शामिल करके केंद्र सरकार ने उन पर जो शिकंजा कसा हुआ है उसके लिए सरकार अभी भी कोई ढ़ील देने के पक्ष में नहीं हैं। यह मामला उच्चतम न्यायालय में है जहां 44 डीम्ड विश्वविद्यालयों पर लटकी तलवार के बीच सुप्रीम कोर्ट तीन मई को अंतिम फैसला सुनाएगी।
केंद्र सरकार ने डीम्ड यूनिवर्सिटी के प्रति कोई ढील नहीं देने का मन बनाया है। ऐसी 44 डीम्ड यूनिवर्सिटी को सरकार ने नोटिस भेजा है, जिनके इंफ्रास्ट्रक्चर में खामी और अध्यापकों की कमी पायी गयी थी। सरकार ने इसके लिए पीएन टंडन की अध्यक्षता में चार विशेषज्ञों की समिति गठित की थी। नोटिस में समिति के सामने अपने पक्ष को दो सप्ताह के भीतर रखने की हिदायत दी गई है। समिति अपनी रिपोर्ट फरवरी में सरकार को सौंप देगी। रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय इन विश्वविद्यालयों के बारे में अपनी राय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखेगा। मानव संसाधन मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने अपने कार्यकाल में 120 डीम्ड यूनिवर्सिटी को मंजूरी दी थी, जिसमें से 44 के खिलाफ नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार द्वारा कार्रवाई शुरू की गई। सरकार की इस कार्रवाई के खिलाफ डीम्ड यूनिवर्सिटी के संचालक सुप्रीम कोर्ट चले गये। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि आरोपित प्रत्येक डीम्ड यूनिवर्सिटी को अलग से सफाई देने का मौका दिया जाए, उसके बाद सरकार अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखे। कोर्ट के इस निर्देश के बाद मंत्रालय ने इन विश्वविद्यालयों को नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि दो सप्ताह के अंदर व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर समिति में अपना पक्ष रखें। मंत्रालय ने टंडन समिति से कहा है कि वे यथा शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करें, जिससे इनके बारे में फैसला लिया जाए।
गौरतलब है कि मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल लगातार कहते रहे हैं कि डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने में बनाये गये मापदंडों में कोई ढील नहीं दी जायेगी। 44 डीम्ड यूनिवर्सिटी के खिलाफ समिति ने जांच के बाद कमियां पाई गई हैं। यदि वे कमियां पूरी करते हैं तो सरकार को इस बारे में कोई परेशानी नहीं है। किसी भी हालत में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के बारे में कोई समझौता नहीं किया जायेगा। सिब्बल ने अपने कार्यकाल में एक भी डीम्ड यूनिवर्सिटी को मंजूरी नहीं दी है। सूत्र बताते हैं कि मानव संसाधन मंत्रालय और कानून मंत्रालय के बीच इस मामले को लेकर गंभीर मंत्रणा चल रही है। जिससे सुप्रीम कोर्ट में तीन मई से शुरू होने वाली सुनवाई में सरकार का पक्ष मजबूती से रखा जा सके। उधर गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय हरिद्वार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि मानव संसाधन मंत्रालय डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने में सौतेला व्यवहार कर रहा है। हरिद्वारा में काफी दिनों से इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिए जाने की मांग की जा रही थी, जब इसे डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला, तो सरकार ने उसे नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए नोटिस दिया गया है।

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