थिंपू में वार्ता, तो पाक से भारत को धमकी
ओ.पी. पाल
मुंबई के 26/11 आतंकी हमले से बिगड़े भारत-पाक संबन्धों को पटरी पर लाने के लिए भारत पूरी तरह से पक्षधर है और थिंपू में भारतीय विदेश सचिव निरूपमा राव तथा पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर की वार्ता में दोनों देशों ने खुले दिमाग से वार्ता करने पर हामी भरी है, लेकिन वहीं दूसरी ओर भारत और पाक के बीच जब भी इस तरह की पहल की जाती है तो पाकिस्तान में जमात उद दावा के नेता हमेशा की तरह फिर बाधक बनते नजर आया जिसके प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद ने चेतावनी दी है कि अगर वह जम्मू कश्मीर से नहीं हटता है तो उसे युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है
कि दोनों देशों के संबन्ध इस प्रकार से परवान कैसे चढेंगे जब पाक सरकार को ऐसे संगठनों पर नियंत्रण करने में विफल हो रहा हो।
भूटान की राजधानी थिंपू में रविवार को भारत और पाक के विदेश सचिवों की सकारात्मक वार्ता हुई और दोनों देशें ने इस बात को कहा कि भारत-पाक के बीच भविष्य में वार्ता जारी रखने के रास्ते तलाशने की कोशिश करेंगे और दोनों देश खुले दिमाग से वार्ता करेगें। एक और जहां भारतीय विदेश सचिव निरूपमा राव तथा पाक के विदेश सचिव सलमान बशीर ने 26/11 हमले के बाद से टूटे हुए संपर्क को फिर से बहाल करने के लिए कई मुद्दे पर चर्चा को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड लश्कर के संदिग्ध एवं जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद ने लाहौर में रविवार को ही करीब 20 हजार समर्थकों को संबोधित करते हुए भड़काऊ अंदाज में कहा कि वह भारत के प्रधानमंत्री है कि कश्मीर छोड़ दो या फिर युद्ध के लिए तैयार रहो। सईद ने यहां तक कहा कि अगर कश्मीरियों को आजादी नहीं दी गई तो हम कश्मीर सहित पूरे भारत पर कब्जा कर लेंगे सईद यह कहने से भी नहीं चूके कि उन्होंने कश्मीर को पाने के लिए गजवा ए हिंद यानि भारत के लिए लड़ाई की शुरूआत करने की पूरी तैयारी कर ली है। प्रतिप्रबंधित संगठन जमात उद दावा के नेतृत्व में रविवार को आतंकवादी संगठन जमात ए इस्लामी, जमायते ए उलेमा ए इस्लाम और अन्य गुटों ने हिस्सा लिया है। पाक का यह आलम है कि आतंकी संगठनों के साथ ही पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कश्मीरियों को अपना समर्थन की बात दोहराई है। जबकि प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव की वजह जम्मू कश्मीर विवाद ही करार देते हुए हाफिज सईद के मुहिम को ही हवा देने का काम किया है। ऐसी स्थिति में थिंपू में भारत और पाक के विदेश सचिवों के बीच हुई वार्ता के कोई मायने नहीं माने जा सकते। भारत और पाक के जानकार विशेषज्ञ का कहना है कि जब भी भारत और पाक के बीच वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए कुछ पहल होती है तो पाक में नाममात्र से प्रतिबन्धित संगठन जमात उद दावा के प्रमुख ने रास्ते में कांटे खड़े करने का प्रयास किया है और भारत के खिलाफ जहर उगलने का प्रयास किया है। ऐसे में भारत को पाकिस्तान को दो टूक जवाब देने की जरूरत है।
ओ.पी. पाल
मुंबई के 26/11 आतंकी हमले से बिगड़े भारत-पाक संबन्धों को पटरी पर लाने के लिए भारत पूरी तरह से पक्षधर है और थिंपू में भारतीय विदेश सचिव निरूपमा राव तथा पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर की वार्ता में दोनों देशों ने खुले दिमाग से वार्ता करने पर हामी भरी है, लेकिन वहीं दूसरी ओर भारत और पाक के बीच जब भी इस तरह की पहल की जाती है तो पाकिस्तान में जमात उद दावा के नेता हमेशा की तरह फिर बाधक बनते नजर आया जिसके प्रमुख हाफिज मोहम्मद सईद ने चेतावनी दी है कि अगर वह जम्मू कश्मीर से नहीं हटता है तो उसे युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है
कि दोनों देशों के संबन्ध इस प्रकार से परवान कैसे चढेंगे जब पाक सरकार को ऐसे संगठनों पर नियंत्रण करने में विफल हो रहा हो।भूटान की राजधानी थिंपू में रविवार को भारत और पाक के विदेश सचिवों की सकारात्मक वार्ता हुई और दोनों देशें ने इस बात को कहा कि भारत-पाक के बीच भविष्य में वार्ता जारी रखने के रास्ते तलाशने की कोशिश करेंगे और दोनों देश खुले दिमाग से वार्ता करेगें। एक और जहां भारतीय विदेश सचिव निरूपमा राव तथा पाक के विदेश सचिव सलमान बशीर ने 26/11 हमले के बाद से टूटे हुए संपर्क को फिर से बहाल करने के लिए कई मुद्दे पर चर्चा को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड लश्कर के संदिग्ध एवं जमात उद दावा के प्रमुख हाफिज सईद ने लाहौर में रविवार को ही करीब 20 हजार समर्थकों को संबोधित करते हुए भड़काऊ अंदाज में कहा कि वह भारत के प्रधानमंत्री है कि कश्मीर छोड़ दो या फिर युद्ध के लिए तैयार रहो। सईद ने यहां तक कहा कि अगर कश्मीरियों को आजादी नहीं दी गई तो हम कश्मीर सहित पूरे भारत पर कब्जा कर लेंगे सईद यह कहने से भी नहीं चूके कि उन्होंने कश्मीर को पाने के लिए गजवा ए हिंद यानि भारत के लिए लड़ाई की शुरूआत करने की पूरी तैयारी कर ली है। प्रतिप्रबंधित संगठन जमात उद दावा के नेतृत्व में रविवार को आतंकवादी संगठन जमात ए इस्लामी, जमायते ए उलेमा ए इस्लाम और अन्य गुटों ने हिस्सा लिया है। पाक का यह आलम है कि आतंकी संगठनों के साथ ही पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कश्मीरियों को अपना समर्थन की बात दोहराई है। जबकि प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने दक्षिण एशिया में बढ़ते तनाव की वजह जम्मू कश्मीर विवाद ही करार देते हुए हाफिज सईद के मुहिम को ही हवा देने का काम किया है। ऐसी स्थिति में थिंपू में भारत और पाक के विदेश सचिवों के बीच हुई वार्ता के कोई मायने नहीं माने जा सकते। भारत और पाक के जानकार विशेषज्ञ का कहना है कि जब भी भारत और पाक के बीच वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए कुछ पहल होती है तो पाक में नाममात्र से प्रतिबन्धित संगठन जमात उद दावा के प्रमुख ने रास्ते में कांटे खड़े करने का प्रयास किया है और भारत के खिलाफ जहर उगलने का प्रयास किया है। ऐसे में भारत को पाकिस्तान को दो टूक जवाब देने की जरूरत है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें