सोमवार, 31 जनवरी 2011

ऐसे तो टैक्स चोरों को मिलेगी राहत!

काले धन पर गठित स्टडी ग्रुप के लक्ष्य नाकाफी
ओ.पी. पाल

विदेशों में जमा काले धन को देश में वापस लाने के मुद्दे पर चौतरफा घिरी केंद्र की यूपीए सरकार योजनाएं बनाने में लगी हुई है ताकि इस चक्रव्यूह से किसी तरह बाहर निकला जा सके। इसी कवायद में काले धन और टैक्स चोरी के मुद्दे पर केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने टैक्स चोरों के लिए स्वैच्छिक रूप से टैक्स चुकाने के मकसद से जिन अध्ययन समूह यानि स्टडी ग्रुप का गठन किया है उससे तो लगता है कि टैक्स चोरों को सजा मिलने के बजाय राहत ही मिलेगी?
केंद्र सरकार द्वारा गठित इस स्टडी ग्रुप को ऐसे विकल्प तैयार करने का लक्ष्य दिया है जिससे टैक्स चोरी को रोका जा के और लोग टैक्स चुकाने के लिए स्वेच्छा से आगे आएं। आर्थिक और टैक्स विशेषज्ञों से शुमार स्टडी ग्रुप ऐसी योजना पर भी अध्ययन करने का काम सौँपा है जिन योजनाओं के जरिए टैक्स देने से बचने वाले लोग स्वेच्छा से टैक्स का भुगतान करने के लिए आगे आएं। ऐसे दो समूह बनाने की घोषणा वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा की गई है। हालांकि ये दोनों ग्रुप काले धन से जुड़े मामलों पर अलग-अलग मुद्दों को देखेंगे। इसमें बेनामी संपत्ति रखने वाले लोगों को आम माफी दिए जाने का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है, तो वहीं आयकर विभाग ने अपने प्रस्ताव में कहा कि व्यवसायिक ढांचे में जटिलताएं, नए वित्तीय प्रोडक्ट, टैक्स चुकाने वालों की बढ़ती संख्या, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बढ़ोत्तरी, ई-कॉमर्स का प्रसार और टैक्स बचाने के लिए अपनाई जाने वाली स्कीम ऐसी योजनाएं हैं जिनके कारण टैक्स प्रबंधन में जटिलताएं और जोखिम देखने को मिल रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि काले धन को देश में वापस लाने की तैयारी में सरकार द्वारा गठित समूहों को जो लक्ष्य दिये गये हैं उनसे टैक्स की चोरी करने वालों को सजा नहीं, बल्कि राहत मिलने का रास्ता साफ किया जा रहा है। दूसरी ओर काले धन पर देशभर में बहस छिड़ी हुई है और सरकार से विपक्ष लगातार टैक्स चोरों और काला धन रखने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग करते हुए दबाव बनाये हुए है। लेकिन सरकार इसके विपरीत स्वैच्छिक ढंग से टैक्स चुकाने को बढ़ावा देने के रास्ते तलाशने में लगी है। आयकर विभाग के सूत्रों की माने तो इन चुनौतियों से परंपरागत तरीके से निपटना इतना आसान नहीं है जितना सरकार मानकर चल रही है। आयकर विभाग का मानना है कि टैक्स कानूनों का पालन करने में लोगों पर भार पड़ता है। यदि लोग ज्यादा रकम टैक्स के रूप में चुका रहे हैं तो वह टैक्स व्यवस्था के बाहर होना चाहते हैं। ऐसे में आयकर विभाग के सामने चुनौती है कि आयकर चुकाने वाले लोगों की विभिन्न श्रेणियों के लिए ऐसी सीमाएं निर्धारित की जाएं ताकि लोग स्वैच्छिक रूप से टैक्स चुकाने में तत्परता दिखाएं। स्टडी ग्रुप टैक्स एकत्र करने के तरीकों और टैक्स चोरी पर लगाम कसने के लिए अपनी सिफारिशें वित्त मंत्रालय को सौंपेगा। केंद्र सरकार पर देश से बाहर गए काले धन को वापस लाने और लिश्नश्टाइन में खाता रखने वाले 26 भारतीयों के नाम सार्वजनिक करने का भी दबाव है। सरकार काले धन को टैक्स चोरी का मसला बता रही है लेकिन विपक्ष और कुछ टैक्स विश्लेषक इसे आतंकवाद, दलाली, काले धन को सफेद बनाने और अन्य अपराधों से जोड़ कर देख रहे हैं। ऐसे में अपनाए जा रहे फार्मूले सरकार को काले धन व टैक्स चोरी के चक्रव्यूह से बाहर निकल सकेगी इसके लिए स्टडी ग्रुप की रिपोर्ट पर नजर रहेगी।

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