शिक्षकों की कमी को पूरा करने की कवायद
ओ.पी. पाल
देश में हिंदी व उर्दू समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के श्क्षिकों की कमी को लेकर मच रही हायतौबा को लेकर केंद्र सरकार ने यह कहकर इसका ठींकरा राज्यों की सरकारों के सिर फोड़ने का प्रयास किया है कि क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए राज्यों से केंद्र सरकार को कोई प्रस्ताव नहीं मिल पा रहे हैं। केंद्र सरकार ने अब राज्यों की सरकारों से क्षेत्रीय
भाषा खासकर स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के बारे में रिपोर्ट मांगी है।मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार राज्य सरकारों की ओर से उर्दू शिक्षकों के बारे में पर्याप्त प्रस्ताव प्राप्त नहीं मिल रहे हैं, जबकि सरकार उर्दू शिक्षकों की कमी को पूरा कराने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए गंभीर है। सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने राज्यों की सरकारों को पत्र भेजकर इस आशय की रिपोर्ट भेजने को कहा गया है किं राज्यों के स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की स्थिति क्या है और किस स्कूल में कितने शिक्षकों की जरूरत है। मंत्रालय के अनुसार राज्यों से उर्दू समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की स्थिति की समीक्षा करेगी, ताकि राज्यों के प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की भर्ती के लिए मंजूरी प्रदान की जा सके। मंत्रालय ने राज्यों से उर्दू के उपलब्ध शिक्षकों और भरे जाने वाले पदों की भी जानकारी मांगी है। राज्यों से केंद्र ने उर्दू माध्यम के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का कक्षावार ब्यौरा भी मांगा है। केंद्र सरकार ने राज्यों से दसवीं एवं 12वीं कक्षा में कितने बच्चों ने उर्दू विषय का चयन किया है और उर्दू पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता की स्थिति से भी अवगत कराने की भी अपेक्षा की है। केंद्र पोषित योजना के तहत गैर हिन्दी भाषी क्षेत्रों में हिन्दी के प्रोत्साहन के लिए हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति के वास्ते 100 प्रतिशत वित्तीय मदद प्रदान की जाती है।छग में चार सालों से नहीं मिली मंजूरीमानव संसाधन मंत्रालय ने राज्यों से उर्दू भाषा की पढ़ाई और निर्देश के रूप में उर्दू माध्यम को प्रेत्साहित करने के संबंध में सुझाव भी मांगे गए। राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद विभिन्न संस्थाओं को अंशकालिक उर्दू शिक्षक उपलब्ध कराता है और प्रति वर्ष करीब एक हजार शिक्षकों को मानद भत्ता भी देता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में वर्ष 2007-08 में अंतिम बार 426उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद छत्तीसगढ़ में एक भी भाषा शिक्षक की नियुक्ति को मंजूरी नहीं मिल सकी है, लेकिन केंद्र सरकार इसके लिए राज्यों को ही दोष देने में लगी है कि राज्यों से शिक्षकों की नियुक्ति की मंजूरी के लिए प्रस्ताव ही नहीं मिल पा रहे हैं। यही कारण है कि इसके बावजूद देश में उर्दू और अन्य क्षेत्रीय शिक्षकों की काफी कमी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार केंद्र पोषित योजना के तहत वित्त वर्ष 2010-11 में केरल के लिए 208 शिक्षकों के पदमंजूर किये गए, जबकि पंजाब के लिए 42 उर्दू शिक्षकों के पदों को मंजूरी दी गई, तो 2009-10 में भी पंजाब में उदू शिक्षकों के 42 पद मंजूर किये गए थे। इसी प्रकार से राजस्थान के लिए 34 उर्दू शिक्षकों तथा उड़ीसा के लिए 25 उर्दू शिक्षकों के पद मंजूर किये गए। इससे पहले 2007-08 में इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के लिए 426, आंध्रप्रदेश के लिए 1400 उर्दू शिक्षकों के पदों को मंजूरी दी गई थी, जबकि हिमाचल प्रदेश के लिए 100 पद मंजूर किये गए थे।
ओ.पी. पाल
देश में हिंदी व उर्दू समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के श्क्षिकों की कमी को लेकर मच रही हायतौबा को लेकर केंद्र सरकार ने यह कहकर इसका ठींकरा राज्यों की सरकारों के सिर फोड़ने का प्रयास किया है कि क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए राज्यों से केंद्र सरकार को कोई प्रस्ताव नहीं मिल पा रहे हैं। केंद्र सरकार ने अब राज्यों की सरकारों से क्षेत्रीय
भाषा खासकर स्कूलों में उर्दू शिक्षकों के बारे में रिपोर्ट मांगी है।मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार राज्य सरकारों की ओर से उर्दू शिक्षकों के बारे में पर्याप्त प्रस्ताव प्राप्त नहीं मिल रहे हैं, जबकि सरकार उर्दू शिक्षकों की कमी को पूरा कराने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए गंभीर है। सूत्रों के अनुसार मंत्रालय ने राज्यों की सरकारों को पत्र भेजकर इस आशय की रिपोर्ट भेजने को कहा गया है किं राज्यों के स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की स्थिति क्या है और किस स्कूल में कितने शिक्षकों की जरूरत है। मंत्रालय के अनुसार राज्यों से उर्दू समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की स्थिति की समीक्षा करेगी, ताकि राज्यों के प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों में उर्दू शिक्षकों की भर्ती के लिए मंजूरी प्रदान की जा सके। मंत्रालय ने राज्यों से उर्दू के उपलब्ध शिक्षकों और भरे जाने वाले पदों की भी जानकारी मांगी है। राज्यों से केंद्र ने उर्दू माध्यम के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों का कक्षावार ब्यौरा भी मांगा है। केंद्र सरकार ने राज्यों से दसवीं एवं 12वीं कक्षा में कितने बच्चों ने उर्दू विषय का चयन किया है और उर्दू पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता की स्थिति से भी अवगत कराने की भी अपेक्षा की है। केंद्र पोषित योजना के तहत गैर हिन्दी भाषी क्षेत्रों में हिन्दी के प्रोत्साहन के लिए हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति के वास्ते 100 प्रतिशत वित्तीय मदद प्रदान की जाती है।छग में चार सालों से नहीं मिली मंजूरीमानव संसाधन मंत्रालय ने राज्यों से उर्दू भाषा की पढ़ाई और निर्देश के रूप में उर्दू माध्यम को प्रेत्साहित करने के संबंध में सुझाव भी मांगे गए। राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद विभिन्न संस्थाओं को अंशकालिक उर्दू शिक्षक उपलब्ध कराता है और प्रति वर्ष करीब एक हजार शिक्षकों को मानद भत्ता भी देता है। लेकिन छत्तीसगढ़ में वर्ष 2007-08 में अंतिम बार 426उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की मंजूरी दी गई थी, जिसके बाद छत्तीसगढ़ में एक भी भाषा शिक्षक की नियुक्ति को मंजूरी नहीं मिल सकी है, लेकिन केंद्र सरकार इसके लिए राज्यों को ही दोष देने में लगी है कि राज्यों से शिक्षकों की नियुक्ति की मंजूरी के लिए प्रस्ताव ही नहीं मिल पा रहे हैं। यही कारण है कि इसके बावजूद देश में उर्दू और अन्य क्षेत्रीय शिक्षकों की काफी कमी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार केंद्र पोषित योजना के तहत वित्त वर्ष 2010-11 में केरल के लिए 208 शिक्षकों के पदमंजूर किये गए, जबकि पंजाब के लिए 42 उर्दू शिक्षकों के पदों को मंजूरी दी गई, तो 2009-10 में भी पंजाब में उदू शिक्षकों के 42 पद मंजूर किये गए थे। इसी प्रकार से राजस्थान के लिए 34 उर्दू शिक्षकों तथा उड़ीसा के लिए 25 उर्दू शिक्षकों के पद मंजूर किये गए। इससे पहले 2007-08 में इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ के लिए 426, आंध्रप्रदेश के लिए 1400 उर्दू शिक्षकों के पदों को मंजूरी दी गई थी, जबकि हिमाचल प्रदेश के लिए 100 पद मंजूर किये गए थे।
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