सोमवार, 31 जनवरी 2011

एयर इंडिया पर भी कैग के निशाने पर सरकार

संसद से पहले लीक रिपोर्ट परेशानी का सबब
ओ.पी. पाल

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की तरह ही एयर इंडिया के एकमुश्त 111 विमान खरीदने के फैसले पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानि कैग ने यूपीए की केंद्र सरकार को कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है। केंद्र सरकार के लिए सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि 2जी स्पेक्ट्रम की तरह ही संसद में पेश होने से पहले एयर इंडिया मामले पर कैग की रिपोर्ट लीक हो गई है, जिस कारण विपक्ष को भी सरकार को घेरने के लिए एक मुद्दा मिल गया है।
संसद में पेश होने से पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्टो के पिछले सालों से निरंतर लीक होने की घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार कठघरे में खड़ी होती नजर आई है। अभी तक 2जी स्पेक्ट्रम के चक्रव्यूह से यूपीए सरकार बाहर नहीं निकल सकी कि उसके लिए एयर इंडिया पर कैग की रिपोर्ट ने उसके लिए एक ओर मुसीबत खड़ी कर दी है। मसलन कि कैग ने इस रिपोर्ट में एयर इंडिया के एकमुश्त 111 विमान खरीद के फैसले को हरी झंडी देने के मुद्दे पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सूत्रों के अनुसार कैग ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में एयर इंडिया द्वारा 43 एयरबस और 68 बोइंग विमानों की खरीद पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि एयरबस से हुए सौदे के तहत अभी तक देश में उनके रखरखाव, मरम्मत एवं ओवरहॉल जैसी सुविधाओं की स्थापना न करने पर भी उंगलियां उठाते हुए सवाल खड़े किये हैं। सूत्रों के अनुसार लीक हुई कैग रिपोर्ट में यहां तक कहा गय है कि एयर इंडिया बोर्ड ने वर्ष 2006 में अपने बेड़े के आधुनिकीकरण के नाम पर लगभग 48 हजार करोड़ रुपये की कीमत पर कुल 111 नए विमान खरीदने के निर्णय को केंद्र सरकार ने मंजूरी भी दे दी है। इस मंजूरी के तहत फ्रांस की एयरबस को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 43 एयरबस ए-320 विमानों के आर्डर दिए गए, जबकि अमेरिकी बोइंग से लगभग 38 हजार करोड़ रुपये में 68 बोइंग विमानों का सौदा किया गया। बताया गया है कि एयरबस से सारे विमान प्राप्त हो चुके हैं, जबकि बोइंग से अभी केवल 40 विमान मिल सके हैं। इन विमानों के लिए सरकारी एविएशन कंपनी एयर इंडिया ने प्रति विमान 3.74 करोड़ डॉलर से लेकर 14.3 करोड़ डॉलर तक की कीमत भी चुकता कर दी है। इस खरीद के लिए हुए समझौते के तहत एयरबस को अपने विमानों के रखरखाव के लिए भारत में एमआरओ सुविधा भी स्थापित करनी थी, लेकिन यह काम अब तक पूरा नहीं हुआ है। कैग ने बोइंग मामले में कैग इस बात से भी हैरान है कि पहले एयर इंडिया कुछ विमान खरीदने और कुछ लीज पर लेने वाली थी तो फिर अचानक सारे विमान खरीदने का फैसला क्यों कर लिया गया। कैग ने अपनी रिपोर्ट में एयर इंडिया की गिरती हिस्सेदारी के कारण खराब होती वित्तीय स्थिति का भी जिक्र करते हुए सरकार पर सवालिया निशान उठाये हैं। वहीं सुरक्षा जोखिम बढ़ने के साथ यात्रियों की घटती संख्या पर भी चिंता जताई गई है।

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