चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक के मायने नहीं
ओ.पी. पाल
बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों ने जिस प्रकार से आपराधिक छविवाले नेताओं को चुनाव मैदान में उतारा है उससे लगता है कि केंद्रीयचुनाव आयोग द्वारा धनबल और बाहुल की चली आर रही प्रवृत्ति को समाप्त करनेके लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के कोई मायने नहीं रह जाते। दरअसल राजनीतिके अपराधिकरण की पंरपरा को समाप्त करने की दिशा में चुनाव आयोग के साथहुई विभिन्न दलों के नेताओं ने समर्थन करके ऐसी दुहाई दी जैसे बिहारचुनाव में उसे सभी पार्टियां लागू कर देंगी, लेकिन देखने में आ रहा है किअन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव की अपेक्षा इस बार बिहार में सभी दल धनबलव बाहुबल के सहारे अपनी चुनावी नैया पार लगाने की ठान चुके हों।बिहार विधानसभा चुनाव में अभी तक दो चरण का चुनाव हो चुका है जबकि तीसरेचरण का चुनाव 28 अक्टूबर को होगा। इन तीन चरणों के चुनाव में ही देखें तोशपथपत्र दाखिल कर ऐसे 379 प्रत्याशी स्वयं स्वीकार कर चुके हैँ कि उनकेखिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं जिनमें पहले चरण के 154 आपराधिक छवि वालेप्रत्याशियों में तीन ऐसे प्रत्याशी रहे जिनके खिलाफ बलात्कार के मामलेचल रहे हैँ। हरिभूमि ने इससे पहले तीन चरणों तक के चुनाव में आपराधिकप्रत्याशियों के बारे में जानकारी प्रकाशित की थी, जिसके बाद चौथे चरणमें कितने प्रत्याशी आपराधिक छवि वाले हैँ की जानकारी दी जा रही है। इसबारे में एक अभिान के तहत काम कर रहे संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिकरिफोर्म्स और नेशनल इलेक्शन वॉच ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मुहिमचलाते हुए ऐसे तथ्य उजाकर किये हैँ जिनसे जाहिर है कि बिहार विधानसभाचुनाव में सभी राजनीतिक दल धनबल और बाहुबल को बढ़ावा दे रहा है। चुनाव मेंआपराधिक छवि के प्रत्याशियों की पड़ताल करने के लिए देश भर के 1200 सेअधिक एनजीओ संगठन काम कर रहे हैँ। नेशनल इलेक्शन वॉच के राष्ट्रीय समन्वयअनिल बैरवाल ने बिहार में चौथे चरण के चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमारहे प्रत्याशियों के दाखिल शपथपत्रों का अध्ययन करने के बाद जो तथ्यउजागर किये हैं उनमें सत्ताधारी जद-यू बाहुबल और धनबल को ज्यादा बढ़ावा देरही है, जबकि कांग्रेस, राजद, लोजपा, भाजपा बसपा आदि दल भी इस परंपरा कोतेजी से बढ़ाने में लगे हुए हैं। इस अभियान में बिहार चुनाव का आकलन कररही गैर सरकारी संस्था इलेक्शन वॉच के बिहार शाखा के संयोजक अंजेश कुमारने भी इन तथ्यों की जोरदार तरीके से पुष्टि की है। संस्था के मुताबिकचौथे चरण तक 1237 प्रत्याशियों के शपथपत्रों के आधार पर 481 प्रत्याशीआपराधिक छवि के दायरे में हैं। जिनमें 288 प्रत्याशी ऐसे हैँ जिनके खिलाफहत्या, हत्या का प्रयास, बलात्कार, लूट व चोरी जैसे संगीन अपराध हैं।जहां तक चौथे चरण में आपराधिक प्रत्याशियों का सवाल है उसमें 91प्रत्याशियों के नाम अपराध जगत से जुड़े हुए हैं जिनमें से 49प्रत्याशियों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास जैसे संगीन मामले लंबितहैँ। चाथे चरण में राजद के 62 प्रतिशत, भाजपा के 53 प्रतिशत, कांग्रेस के41 प्रतिशत, लोजपा के 40 प्रतिशत, जद-यू के 38 व बसपा के 37 प्रतिशतप्रत्याशी अपराधी छवि वाले हैँ। इन चारों चरण के प्रत्याशियों का आकलनकिया जाए तो बसपा के 164 में 62, जद-यू के 102 में 54, भाजपा के 73 मेंसे 47, कांग्रेस के 171 में 64, राजद के 122 में 69, लोजपा के 53 में 32प्रत्याशी अपराधिक मामलों से लबरेज हैँ। धनबल की बात की जाए तो वर्ष 2005के चुनाव में जहां करोड़पति प्रत्याशियों की संख्या केवल 36 थी तो इस बारचौथे चरण तक के प्रत्याशियों क शपथपत्रोें के विश्लेषण बता रहे हैं कियह संख्या बढ़कर 147 हो गई है, जबकि अभी दो ओर चरणों का चुनाव बाकी है।
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