रविवार, 28 नवंबर 2010

तो 2012 से शुरू हो जाएगा अंतरिक्ष पर्यटन

ओ.पी. पाल

दुनिया भर में पर्यटन क्षेत्र का विस्तार हुआ है तो दुनिया भर के धनवानपर्यटकों का एक ही सपना बचा है कि वे पृथ्वी के चक्कर काट रहो स्पेस शटलएंडेवर अंतरिक्ष में जाएं। ऐसे पर्यटकों का यह सपना भी साकार होने जा रहाहै यानि 2012 से वर्जिन गैलैक्टिक स्पेस टूरिज्म की फ्लाइट शुरू करने जारहा है जो विमानों के लिए नए रनवे तैयार कर चुका है, जिसका दावा है कि2012 से वह लोगों को अतंरिक्ष तक घुमाएगा।गैलैक्टिक स्पेस कंपनी के मालिक रिचर्ड ब्रैंसन ने लोगों के इस सपनो कोसाकार करने के लिए अमेरिका के न्यू मेक्सिको में नए रनवे तैयार कर लियेहैँ। ब्रैंसन का कहना है कि यह स्पेस एज का दूसरा दौर है और हमें गर्व हैकि हम कहानी के इस मोड़ पर अपना योगदान दे रहे हैं। उनका मानना है कि यहांसे शायद हर रोज अंतरिक्ष के लिए फ्लाइटें रवाना होंगी। यही नहींवैज्ञानिक, एक्सप्लोरर हमारे ग्रह के आगे और नए विकल्प तलाश रहे हैँजिसके बाद इन सेवाओं का विस्तार संभव हो सकेगा। अंतरिक्ष पर्यटन के लिएलोगों के पहुंचाने की पुष्टि नील आर्मस्ट्रॉन्ग के साथ चांद पर कदम रखनेवाले एड्विन 'बज' एल्ड्रिन का भी कहना है कि यह कोई सपना ही नहीं बल्किहकीकत होगी कि आम लोग अंतरिक्ष में जा सकेंगे। जब 2012 के अंतरिक्षटूरिस्ट स्पेसशिप 2 या वीएसएस एंटरप्राइज पर सवार होंगे और इसमें छहयात्रियों के लिए जगह है और इसकी टेस्टिंग इस साल मार्च में संपन्न हुई।इस अभियान के तहत शुक्रवार को ही आकाशगंगा मिल्की वे-पृथ्वी का घर विमानने रनवे से टेक आॅफ किया और काफी देर तक आसमानों की ऊंचाईयों में घूमतारहा। कंपनी की माने तो स्पेसशिप करीब 18 मीटर लंबी है। शून्य गुरुत्व काआभास कर रहे अंतरिक्ष यात्री आराम से इसके कैबिन में तैर सकेंगा। उड़ान भररहा स्पेसशिप का 'मदर शिप' वाइट नाइट 2 या ईव, स्पेसशिप को 50 हजार फीटकी ऊंचाई तक ले जाएगा और उसे वहां छोड़ देगा। स्पेसशिप 2 अपना रॉकेट फायरकरेगा और रॉकेट के दम पर अंतरिक्ष पहुंच जाएगा। बाहर पहुंचकर स्पेसशिपमें बैठे यात्री पृथ्वी को विमान की गोलाकार खिड़कियों यानी पोर्टहोल सेदेख सकेंगे। बताया जा रहा है कि अपने सीटबेल्ट उतार कर आराम से शिप मेंतैर भी सकेंगे। ब्रैंसन का तो यहां तक कहना है कि इस वक्त स्पेसशिप कोसबआर्बिटल ही रखा गया है, यानी स्पेसशिप को इस तरह लांच किया जाएगा कि वहपृथ्वी के चारों तरफ एक पूरा चक्कर न काट सके। कुछ समय बाद पृथ्वी केचक्कर काटने वाले शिप्स भी बनाए जा सकेंगे। यही नहीं अंतरिक्ष में होटलभी बनाए जा चुके हैं जिनकी बुकिंग गैलेक्टिक ने वर्ष 2005 से ही शुरू करदी थी। एक टिकट का दाम है लगभग दो लाख डॉलर यानी करीब 80 लाख रुपये होगा,लेकिन इस दर पर भी 380 से ज्यादा लोग अंतरिक्ष की यात्रा करने को तैयारहैं। अंतरिक्ष का अनुभव रखने वाले महानुभावों के अलावा 2012 में जा रहेकुछ यात्री भी रनवे के उद्घाटन के समय मौजूद रहे। अगर अंतरिक्ष जाने केलिए महंगी टिकट आम आदमी को खटकती है, तो इसमें कोई चिंता वाली बात नहींहै। पृथ्वी पर रहकर भी तेज रफ्तार के मजे लिए जा सकते हैं। वर्जिन एक ऐसेतकनीक पर काम कर रहा है जिससे कुछ सालों में पृथ्वी पर ही एक जगह सेदूसरे जगह तक और कम समय में पहुंचा जा सके।

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