गुरुवार, 23 दिसंबर 2010

भ्रष्टाचार मुद्दे पर सरकार को घेरने को तैयार विपक्ष

ओ.पी. पाल

संसद का शीतकालीन सत्र मंगलवार को जैसे ही शुरू होगा तो विपक्ष यूपीए सरकार को खासकर भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर उसे घेरने के लिए तैयार होगा, जबकि कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ने भी विपक्ष का मुकाबला करने के लिए अपनी खास रणनीति तैयार की है। इसलिए संसद के इस सत्र की शुरूआत हंगामेदार होने की संभावना है।संसद के मंगलवार से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में भ्रष्टाचार का मुद्दा छाया रहेगा और एकजुट विपक्ष राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार, 2जी-स्पेक्ट्रम एवं आदर्श हाउसिंग सोसाइटी सहित विभिन्न घोटालों को सदन में उठाएगा। इस दौरान सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामे के आसार हैं। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा ने जहां धमकी दी है कि यदि घोटाले में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होती तो वह सदन नहीं चलने देगी वहीं कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कुछ लोगों के कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के मुद्दे पर विपक्ष पर हमले की रणनीति बनायी है। आदर्श हाउसिंग घोटाला विपक्ष के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार पर हमला करने के लिए हथियार बन गया है। इसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण भी कथित रूप से शामिल है। विपक्ष सदन में क्या रुख अपनाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाले राजग और वाम दलों ने इस बात के संकेत दे दिये हैं कि घोटालों को लेकर वे सरकार की घेराबंदी करेंगे। दूसरी ओर संसद सत्र के दौरान विपक्ष का सामना करने के लिए कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति तैयार कर ली है, ताकि विपक्ष को मुहंतोड़ जवाब दिया जा सके। इससे पहले मानसून सत्र के पहले उसने विपक्ष के महंगाई और राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में विलंब के मुद्दे पर कांग्रेस ने अमित शाह प्रकरण के जरिए चुनौती का सामना किया था। सूत्रों के अनुसार वहीं इस बार प्रमुख विपक्षी दल भाजपा की ओर से आदर्श हाउसिंग सोसायटी घोटाले और राष्ट्रमंडल खेलों में हुए कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे का सामना करने के लिए कांग्रेस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर सीधा निशाना साधकर अपना बचाव करने की तैयारी में है। पिछले सप्ताह ही संपन्न हुई एआईसीसी की बैठक में कांग्रेस के इरादे साफ नजर आ गये थे कि वह संसद सत्र में विपक्ष के मुद्दों के लिए कौन सा हथियार प्रयोग करेगा। लेकिन भाजपा भी इस बात को लेकर पूरी तरह से सजग है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार व घोटाले के मुद्दे पर अपना बचाव संघ के नेताओं को आतंकवाद से जोड़ने वाले हथियार को सामने लाएगी, इसलिए भाजपा पहले से ही कांग्रेस को संघ के नेताओं को आतंकवाद से जोड़ने का मामला संसद में उठाकर सरकार को घेरेगी। कांग्रेस को यह भलीभाति अहसास है कि अयोध्या मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आए फैसले से भाजपा और संघ परिवार लाभ लेने का प्रयास करेंगे इसीलिए भगवा आतंकवाद का मुद्दा उछाल दिया गया है। अब वह संघ जोकि सरकार को घेरे रहने में कोई कसर नहीं छोड़ता वह अपने बचाव में उतर आया है और देशव्यापी धरने के माध्यम से यह संदेश देना चाहता है कि उसे बदनाम करने की साजिश की जा रही है। हालांकि इस मुद्दे पर भाजपा को समूचे विपक्ष का साथ मिलना संभव नहीं है, लेकिन वह अन्य मुद्दों पर विपक्ष को एकजुट करने का प्रयास जरूरत कर रही है। हालांकि सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास भ्रष्टाचारव घोटालों के अलावा महंगाई और किसानों के मुद्दे भी हैं, जिस पर विपक्ष की एकजुटता संभव है। हालांकि संसद के शीतकालीन सत्र का पहले दिन प्रश्नकाल होने की संभावनाएं क्षीण हैं और पहला दिन भ्रष्टाचारऔर घोटालों पर एकजुट विपक्ष के हंगामें की भेंट चढ़ना तय माना जा रहा है।आखिर गिर ही गई कलमाडी व चव्हाण पर गाजअमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत छोडते ही कांग्रेस हाईकमान ने राष्ट्रमंडल खेलों में भ्रष्टाचार और मुंबई में आदर्श सोसायटी घोटाले से जुड़े राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण पर कार्यवाही रूपी तलवार चलाते हुए उनसे इस्तीफे ले लिये। इन दोनों नेताओं पर भ्रष्टाचार के मामले में यह गाज गिरी है।महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण मुंबई में आदर्श सोसायटी के आवंटन में हुए कथित घोटाले से जुड़े हैँ तो सुरेश कलमाड़ी का नाम राष्टÑमंडल खेलों की तैयारी में हुए भ्रष्टाचार के साथ जुड़ा रहा है। इन दोनों मामलों को लेकर कांग्रेस की अच्छी खासी फजीहत हो रही थी, लेकिन पहले राष्टÑमंडल खेलों का आयोजन करना और फिर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा को लेकर कांग्रेस चाहते हुए भी इन दोनों नेताओं के खिलाफ कोई कार्यवाही अमल में नहीं ला सकी, लेकिन बराक ओबामा के भारत छोड़कर इंडोनेशिया रवाना होने के कुछ घंटे बाद ही कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी की साख बचाने के प्रयास में इन दोनों नेताओं पर ऐसी गाज गिराई कि सुरेश कलमाड़ी को कांग्रेस संसदीय दल के सचिव पद तथा अशोक चव्हाण को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का आदेश दिया। दोनों नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के इस आदेश का पालन करते हुए अपने-अपने इस्तीफे दे दिये हैं। कांग्रेस के महासचिव एवं मीडिया प्रभारी जनार्दन द्विवेदी के अनुसार राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते सुरेश कलमाडी से इस्तीफा देने को कहा गया और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कलमाड़ी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। समझा जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान ने कलमाडी और चव्हाण का अब और बचाव न करने का फैसला कर दोनों को इस्तीफा लेना ही बेहतर समझा। हालांकि चव्हाण पहले ही अपने इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं,लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का मुंबई दौरा पहले से निर्धारित था इसलिए अब तक उनका बचाव किया गया। जहां सुरेश कलमाडी के संसदीय दल के सचिव पद से दिये गये इस्तीफे को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंजूर कर लिया है, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले अशोक चव्हाण की अर्जी को स्वीकार करते हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल के. शंकरनारायणन ने उन्हें नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने तक अपने पद पर काम करने को कहा है।गौरतलब है कि सुरेश कलमाड़ी राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी में हुए व्यापक भ्रष्टाचार के कारण कांग्रेस की किरकीरी का कारण बने तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण मुंबई के कोलाबा इलाके में आदर्श आवासीय सोसायटी की योजना के तहत कारगिल शहीदों की विधवाओं एवं परिजनों के लिए बनाए गये फ्लैटों के आवंटन में हुए कथित घोटाले में चर्चा में आए, जिसमें उनके परिजनों को भी फ्लैट आवंटित किये गये थे। इन दोनों मामलों पर कांग्रेस पार्टी की साख को बट्टा लग रहा था, जिसमें विपक्ष के हमलों से बचने के लिए कांग्रेस हाई कमान ने तेजी से कार्यवाही करते हुए इन दोनों नेताओं के खिलाफ यह कार्यवाही की है। हालांकि इन मामलों की जांच वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी और रक्षा मंत्री एके एंटोनी की समिति कर रही है, लेकिन विपक्षी दल इपर राजनीति फायदा उठाने का मौका तलाश ही रहे थे कि कांग्रेस ने दोनों नेताओं पर गाज गिराकर विपक्ष के तेवरों को नरम कर दिया है। हालांकि राष्ट्रमंडल खेलों में हुए भ्रष्टाचार को लेकर विपक्षी दलों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित, केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एस. जयपाल रेड्डी, खेल मंत्री एमएस गिल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्रीमती अंबिका सोनी पर भी विपक्षी दलों का निशाना है, जिनके इस्तीफे की विपक्षी दल पहले ही मांग कर चुके हैं।

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