गुरुवार, 28 अक्टूबर 2010

पार्कों में कैद रहेंगे भिखारी

छवि बचाने में जुटी
ओपी पाल
राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों में व्यापक स्तर पर अभियान चलाने केबावजूद दिल्ली की सरकार भिखारियों को दिल्ली से बाहर करने में विफल रहीहै, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था को अंजाम देने में जुटी सरकार राष्ट्रमंडलखेलों के दौरान इन भिखारियों को पार्को में कैद करने की योजना बना रहीहै, ताकि राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान दिल्‍ली की छवि खराब नहीं हो सके।केंद्र और दिल्ली सरकार भिखारियों को लेकर चिंतित है कि राष्ट्रमंडल केदौरान भिखारियों के सड़कों पर रहने से राष्ट्रीय राजधानी की छवि खराब होसकती है। इसी लिहाज से राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान भिखारियों और बेसहारोंको सरकार ढके हुए पार्कों में 'छुपा' देने की योजना को अंजाम देने जा रहीहै? ताकि इन खेलों के दौरान दिल्ली आने वाले विदेशी मेहमान और अपनी जनताउन्हें न देख सके। इन पार्कों को टेंट और कॉमनवेल्थ गेम्स के बैनरों सेढंका जाएगा, ताकि बाहर से ये खूबसूरत दिखाई दें। दिल्ली सरकार के एकअधिकारी की माने तो सरकार ने ऐसे कुछ जगहों की तलाश की है जहां भिखारियोंऔर बेसहारों को राष्ट्रमंडल खेलों के खत्म होने तक बसाया जा सकता है। इनअस्थायी शिविरों में भिखारियों को रोकने के लिए सरकार उन्हें भोजन औरजरूरत की दूसरी बुनियादी चीजें मुहैया कराने पर विचार कर रही है। दिल्लीसरकार के एक अधिकारी ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए वे खुलेमें शौच वगैरह न करें सरकार मोबाइल टॉयलेट का भी इंतजाम करेगी। गौरतलब हैकि दिल्ली सरकार ने पहले इन भिखारियों और बेघर, बेसहारा लोगों को उनकेगृह राज्यों में भेजने की कोशिश की थी। लेकिन जब सरकार की यह कोशिश रंगनहीं ला पाई तो उन्हें पार्कों में बने कैंपों में 'छुपाने' की योजनाबनाई गई है। सूत्रों के अनुसार सरकार की कोशिश होगी कि पार्कों को सुंदरबैनरों और कॉमनवेल्थ खेलों के बड़े आकार के शुभंकर लगाकर ढंक देंगे, जिससेऐसे पार्क अस्थायी बसेरे बन जाएंगे।भिखारियों की संख्या पर एक नजरदिल्ली में वर्ष 2007 में संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक करीब 58, 570भिखारी हैं। दिल्ली में भीख मांगने पर बॉम्बे प्रिवेंशन आफ बेगिंग एक्ट1959 के तहत गैरकानूनी है। समय-समय पर इस कानून के सहारे भिखारियों केखिलाफ कार्रवाई के जरिए सरकार इस समस्या को रोकने की बात करती है। केंद्रसरकार के सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्रालय द्वारा भिखारियों को समाजकी मुख्यधारा में शामिल करने के लिए तकनीकी और वोकेशनल शिक्षा दिलाकररचनात्मक कामों में लगाने की योजना 1992-93 में बनाई गई थी, जिसे वर्ष1998-99 में बंद कर दिया गया था। ऐसे में भिखारियों को छुपाने के लिएदिल्ली सरकार के सामने एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

कोई टिप्पणी नहीं: