भारत में फाइलों का अम्बर रखना ब्यूरोक्रेसी की शान?
भारत के नौकरशाह अपनी लालफीताशाही में चीन को भी पीछे छोड़ चुके हैं, जिन्हें फाइलों का अम्बर लगाने में अधिक विश्वास है यानि नौकरशाह और लालफीताशाही के मामले में भारत एशिया का सबसे बड़ा नकारा देश साबित किया गया है। यह रैंकिंग एक सर्वेक्षण के दौरान सामने आई है।हांग
कांग में पॉलिटिकल एंड इकॉनॉमिक रिस्क कंसलटेंसी यानि पीईआरसी द्वारा कराये गये एक सर्वेक्षण में नौकरशाही और लालफीताशाही के मामले में भारत के बाद दूसरा देश इंडोनेशिया है जहां लालफीताशाही के चक्कर में पड़ना एक कष्टकारी अनुभव समझा जाता है। इस सर्वे के नतीजों ने एक ऐसी धारणा पर मुहर लगा दी है, जिसमें भारत को नौकरशाही और लालफीताशाही के मामले में एशिया का सासे नकारा देश करार दिया गया है। इस सर्वे में 12 देशों में नौकरशाही और लालफीताशाही का मूल्यांकन किया गया। भारत में लालफीताशाही और नौकरशाही सबसे ख़राब आंकी गई है और भारत ने लिस्ट में पहला स्थान प्राप्त किया है। लालफीताशाही के मामले में भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। भारत के बाद दूसरा स्थान इंडोनेशिया का आता है और फिर तीसरे स्थान पर फिलीपींस को जगह मिली है। कंसलटेसी का कहना है कि लालफीताशाही भारत और चीन में एक गंभीर समस्या है लेकिन दोनों देशों में अलग अलग राजनीतिक व्यवस्था होने की वजह से भारत में हालात ज्यादा सिरदर्द पैदा करते हैं। रैंकिंग तय करने के लिए हर देश को 1 से 10 के पैमाने पर आंका गया और जिस देश की नौकरशाही सासे सुस्त और भ्रष्ट रही उसे सबसे ज्यादा अंक मिले। इसके लिए करीब 1,500 वरिष्ठ प्रबंधकों से बात की गई। भारत ने सबसे ज्यादा 9.41 अंक पाए जाकि इंडोनेशिया 8.59 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। चीन का स्थान पांचवा है और उसे 7.93 अंक मिले हैं। सर्वे के मुताबिक हांगकांग और सिंगापुर की लालफीताशाही और नौकरशाही बेहद सक्षम और कार्यकुशल है. सिंगापुर को सासे कम 2.53 अंक मिले हैं जाकि हांगकांग को 3.49 अंक दिए गए। भारत के बारे में अपनी टिप्पणी में पीईआरसी का मानना है कि राजनीतिक लोग सुधार लाने का वादा तो करते हैं और भारतीय नौकरशाही को नई जान देने का भरोसा दिलाते हैं, लेकिन आ तक वह ऐसा नहीं कर पाए हैं। इसका कारण माना गया कि प्रशासनिक व्यवस्था अपने आप में सत्ता केंद्र बन चुकी है। भारत की नौकरशाही से दो चार होना किसी भी भारतीय के लिए बेहद हताशाजनक अनुभव हो सकता है। पीईआरसी कंसलटेसी के सर्वेक्षण के अनुसार भारत में प्रशासनिक व्यवस्था के सत्ता केंद्र बन जाने की वजह से उन्हें सुधारे जाने के प्रयासों में मुश्किलें पेश आ रही हैं।
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